उन्नत बाज़ार में एक-एक हरकत को पकड़ने की व्यवस्था होती है। जो अनजान हैं, वे हवा में तीर चलाते हैं। जो जानते हैं, वे पक्की गणना के आधार पर फैसला करते हैं। जैसे, अपने यहां एक सूचकांक हैं इंडिया वीआईएक्स। यह निफ्टी के आउट ऑफ द मनी (ओटीएम) ऑप्शन के भाव पर आधारित होता है। इसे डर का सूचकांक माना जाता है। यह हमेशा निफ्टी से उल्टी दिशा में चलता है। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दिशा…औरऔर भी

अगर आपको कमोडिटी, फॉरेक्स या शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाई करनी है तो इसकी पूर्वशर्त है कि आपको चार्ट पर भावों की भाषा पढ़नी आनी चाहिए। इसके बावजूद हम अक्सर चार्ट पर वही देखते हैं जो सोचते हैं। इस आत्मग्रस्तता को भी तोड़ना पड़ता है। फिर भी आपने जो आकलन किया था, वैसा नहीं हुआ तो सिर धुनने की बात नहीं क्योंकि ऐसा सबसे साथ होता है। यह अनिश्चितता का खेल है। अब हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

शेयर बाज़ार वो जगह है जहां अठ्ठे-कठ्ठे बच्चा तक मुनाफा कमा सकता है। लेकिन ऐसे कच्चे लोग अक्सर कमाई का कई गुना गंवा बैठते हैं। सच्चे ट्रेडर के लिए असली चुनौती है बराबर कमाना। गाड़ी चलती रही, गढ्ढों में न धंसे। इसके लिए मन को इतना निर्मल रखना होता है कि चार्ट के भावों की भाषा से सीधा संवाद बन जाए। टेक्निकल एनालिसिस के हर इंडीकेटर के ऊपर हैं भाव। अब करते हैं सप्ताह का आखिरी अभ्यास…औरऔर भी

न्यूटन का पहला नियम कहता है कि कोई वस्तु तब तक उसी अवस्था में बरकरार रहती है जब तक कोई बाहरी बल उसे मजबूर नहीं कर देता। इसीलिए तेज़ भागती गाड़ी खटाक से नहीं मुड़ती। लेकिन शेयर बाज़ार में किसी बाहरी बल से ज्यादा अंदर का बल काम करता है। लालच और भय के अलावा यहां ईर्ष्या और जलन जैसी भावनाएं भी जलवा दिखाती हैं। यहां इन भावनाओं से ऊपर उठना जरूरी है। अब गुरुवार की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार में दसियों हज़ार लोग होंगे जो अपनी आंखों या बुद्धि से ज्यादा कानों पर विश्वास करते हैं। वे अफवाहों पर खरीदते-बेचते हैं और खबर आने पर निकल जाते हैं। चुनाव नतीजों से पहले रात ग्यारह बजे कोलकाता से एक सज्जन का फोन आया कि कोई ‘खबर’ हो तो बताइए। मैंने कहा कि सुबह 8 बजे से सब साफ होने लगेगा। फिर अभी से काहे की हड़बड़ी। हड़बड़ाइये मत, भावों का भाव पढ़िए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जो तर्क से चलता है, उसे आप दाएं-बाएं करके पकड़ सकते हैं। पर जो भावना से चलता है, उसे तर्क से पकड़ना बेहद मुश्किल है। और, शेयर बाज़ार तर्क से कम और भावना से ज्यादा चलता है। कल हमने अभ्यास के लिए तीन स्टॉक्स डीएलएफ, मारुति और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ पेश किए। तर्क कहता था कि डीएलएफ जैसा कमज़ोर स्टॉक तो अब मुनाफावसूली का शिकार हो ही जाएगा। लेकिन वो तो 7.83% चढ़ गया। अब वार मंगल का…औरऔर भी

2004 के लोकसभा नतीजों के बाद बाज़ार 17% गिरा। 2009 के नतीजों के बाद 17% बढ़ा। वहीं 2014 के बम्पर नतीजों के बावजूद निफ्टी केवल 1.12% बढ़ा। हालांकि पिछले तीन महीनों में करीब 20% पहले ही बढ़ चुका था। लेकिन अभी सब कुछ शांत भाव से हो रहा है। पहले जैसी हड़बोंग नहीं। मोदी सरकार अगले तीन महीनों में क्या फैसले करती है, इसी से बाज़ार का भरोसा टिकेगा या टूटेगा। अब बदले ज़माने का पहला वार…औरऔर भी

तैयारी हर तरफ है। वित्त मंत्रालय सेबी व रिजर्व बैंक समेत शीर्ष वित्तीय नियामकों की बैठक कर चुका है। शेयर बाज़ार व बांड बाज़ार को संभालने की खास तैयारियां हैं। बैकों को खासतौर पर हिदायत दी गई है कि बड़ी लांग पोजिशन लेने से बचें। अनिश्चितता के बीच आशंका! कहीं 17 मई 2004 या 16 मई 2009 जैसा हाल न हो जाए जब बाज़ार ने जबरदस्त तूफान मचाया था। इस बार क्या रहेगा उपयुक्त, देखते हैं आगे…औरऔर भी

कंपनियों के विज्ञापन और नेताओं के बयान में ज्यादा फर्क नहीं होता। एक नेताजी बोले कि देश में अच्छे दिन आ गए। इसका सबूत है कि शेयर बाज़ार इतना चढ़ गया। लेकिन बाज़ार तो इसलिए बढ़ा है क्योंकि विदेशियों ने झटपट मुनाफा कमाने के लिए शुक्र से लेकर अब तक इसमें 6033.04 करोड़ डाले हैं, जबकि देशी संस्थाओं ने 1042.17 करोड़ निकाले हैं। विदेशी कमाएं, देशी लुटाएं तो अच्छे दिन कैसे? खैर, हम चलें गुरु की डगर…औरऔर भी

आज बुद्धपूर्णिमा है। इस मौके पर शेयर बाज़ार खुला है, लेकिन सेटलमेंट बंद है। इसलिए कैपिटल सेगमेंट में कल किए गए सौदों का सेटलमेंट आज नहीं, बल्कि बुधवार के सौदों के साथ शुक्रवार को होगा। वैसे, बुद्ध का जिक्र आया तो बता दें कि वे कृष्ण या राम जैसे भगवान नहीं, हमारे-आप जैसे इंसान थे। उनके जैसा शांत मन और तर्क-पराणयता मिल जाए तो ट्रेडिंग में हम कभी लस्त-पस्त नहीं हो सकते। पकड़ते हैं बुध की बौद्ध-दृष्टि…औरऔर भी