आती-जाती सांस पर ध्यान लगाने से मन का भटकाव थमता जाता है। एहसास होने लगता है कि अतीत की यादों या भविष्य के ख्वाबों में भटकना मन की आदत बन चुकी है। धीरे-धीरे आप उसे खींचकर वर्तमान में लाते हो। फिर वर्तमान में जीने की आदत के साथ-साथ मन स्थितप्रज्ञ बनने लगता है, आपके विचार व भावनाओं में संतुलन आने लगता है और जो जैसा है, उसे आप वैसा ही देखने लगते हैं। अब मंगलवार की बुद्धि…औरऔर भी

अवचेतन मन में बैठी नकारात्मक धारणाओं, विचारों और भावनाओं से समय रहते कैसे निजात पा ली जाए, यह बड़ा अहम मसला है। उनसे मुक्ति न पाई गई तो वे बड़ी घातक हो सकती हैं। इसे रोकने का पहला उपाय है कि हम अपने अंतर्मन के प्रति सचेत हो जाएं। पता लगाएं कि हमारे अंदर जाने-अनजाने क्या-क्या चलता रहता है। आंख मूंदने से यह काम नहीं होगा। हां, आनापान ध्यान इसका कारगर तरीका है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

हमारे अवचेतन दिमाग में गहरे पैठी मान्यताओं व धारणाओं से हमारे सचेत विचारों की लड़ी फूटती है और इन्हीं विचारों से भय, लालच, क्रोध, चिंता व संशय जैसी भावनाएं पैदा होती हैं। जब इस तरह की भावनाएं सक्रिय हो जाती हैं तो वे हमसे ऐसे काम करवाती हैं जिनके बारे में हमने सोच रखा था कि वैसा नहीं करेंगे। ट्रेडर का सारा अनुशासन टूट जाता है और वो गलतियां करता चला जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

रिजर्व बैक ने दो महीने में दूसरी बार रेपो या बैंकों को दिए जानेवाले अल्पकालिक ऋण पर ब्याज 0.25% बढ़ाकर 6.50% कर दी। इसका कितना असर उद्योग से लेकर आम लोगों के ऋण के महंगा होने पर पड़ेगा, यह महज कयासबाज़ी है क्योंकि ऋण की कम मांग के बीच बैंक ब्याज दर बढ़ाएंगे, यह कहना मुश्किल है। शायद इसीलिए रिजर्व बैंक ने 2018-19 में जीडीपी के विकास का अनुमान 7.4% पर बनाए रखा। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

बचपन के कुछ नकारात्मक अनुभव हमारा नजरिया बांध देते हैं। वे हमारी मान्यताओं व धारणाओं को नकारात्मक, अतार्किक व सीमित बना देते हैं। इनकी गांठें हमारे अवचेतन मन में कुंडली मारकर बैठ जाती हैं। किसी ने कह दिया कि तुम्हारी किस्मत बहुत खोटी है या तुम गणित में बहुत कमज़ोर हो। फिर उसका बोझा हम ढोने लगते हैं। मान बैठते हैं कि सफल ट्रेडर बनने के लिए किस्मत का धनी होना पड़ता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अगर आप मानते हैं कि विचार हमेशा सचेत व तार्किक होते हैं तो गलत हैं। विचार अधिकांशतः दिमाग में चल रही कल्पनाओं, मान्यताओं, पूर्वाग्रहों, मूल्यों व नजरिए के घात-प्रतिघात का नतीजा होते हैं। ये तमाम विचार हमारे लिए फायदेमंद या आत्मघाती हो सकते हैं। दुर्भाग्य से ज्यादातर विचार आत्मघाती होते हैं क्योंकि हम उस दौर में रह रहे हैं जब राजनीति से लेकर अर्थनीति व समाज में झूठ व प्रपंच का बोलबाला है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

हमारा अवचेतन मन ही मूलतः हमारे विचारों, भावनाओं व बर्ताव का फैसला करता है। यकीनन इसमें चेतन मन का भी योगदान होता है। लेकिन चेतन मन का मुख्य काम किसी रथ के सारथी या कार के ड्राइवर जैसा है। वो अवचेतन मन को जितना बेहतर ट्रेनिंग देगा, उसे जितना रवां रखेगा, उसके विचार, भावना व बर्ताव उतने ही ज्यादा सच या यथार्थ पर आधारित होंगे और वह उतने ही अच्छे नतीजे हासिल करेगा। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

हमारे मन, मस्तिष्क व शरीर में हर क्षण लाखों सूचनाएं प्रोसेस होती हैं। शरीर की दस लाख कोशिकाओं में से हर कोशिका में प्रति सेकेंड कम से कम एक लाख प्रतिक्रियाएं होती हैं। इन सबके घात-प्रतिघात से हमारे विचारों से लेकर भावनाओं और बर्ताव का फैसला होता है। हमें केवल अपने चेतन मस्तिष्क का भान रहता है। बाकी सब कुछ हमारे लिए अनजाना है। सफलता के लिए इन अनजाने को जानना पड़ता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

जो लोग अल्गोरिदम ट्रेडिंग करते हैं, उनकी बात अलग है क्योंकि उनके लिए सारा काम कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कर देता है। लेकिन आम ट्रेडर खरीदने व बेचने के जो भी सौदे करता है, उसका सारा फैसला पहले उसके दिमाग में होता है। इसलिए उसे हमेशा यह हकीकत याद रखनी चाहिए कि उसके दिल-दिमाग, मन व शरीर का 95% से 97% काम उसके चेतन से बाहर है जिसे उसका अवचेतन या अचेतन दिमाग चलाता है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

वही-वही काम करते रहें और सोचें कि उसका पहले से अलग परिणाम आ जाएगा तो ऐसा नहीं हो सकता। कर्म बदलने से ही परिणाम बदलता है। लेकिन पहले ज़रूरी है कि पता चले कि आपके कर्म में कहां गलती है और साथ ही आप उसे दिल से स्वीकार करें। गलती पता भी चल गई और आपने उसे स्वीकार नहीं किया तो कोई नतीजा नहीं निकलेगा क्योंकि ट्रेडिंग तो आखिरकार आपको ही करनी है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी