दुनिया में कुछ स्थिर नहीं। सब कुछ निरंतर बदलता रहता है। ऐसे में किसी विचार या रणनीति से चिपक जाना घाटे का सबब बन सकता है। शेयर बाज़ार में भी यही होता है। बाज़ार की वर्तमान अवस्था में घुसने और निकलने की अलग रणनीति होनी चाहिए। फिलहाल पूरा बाज़ार व अच्छे स्टॉक्स लगातार बढ़ रहे हैं तो एंट्री का सर्वोत्तम तरीका है मूविंग औसत। ऐसा ही एकदम अलग तरीका निकलने का है। अब चुनावी माहौल का ट्रेड…औरऔर भी

अक्सर हम निवेश के लिए कोई कंपनी अंदाज़ से चुनते हैं या आलस्य कर जाते हैं कि ऊपर-ऊपर तो अच्छी दिख रही है। ऐसा निवेश ज़्यादातर धोखा देता है। वहीं, जब हम रिसर्च के दम पर निवेश करते हैं तो उसका बढ़ना लगभग तय रहता है। दो साल पहले हमने यहीं वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स के दोगुना होने की संभावना जताई थी। वो शेयर तब 480 पर था, अभी 1060 पर है। तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार लंबे समय में किसी देश की अर्थव्यवस्था और वहां की कंपनियों की सेहत व भावी संभावना का आईना होता है। लेकिन छोटे समय में वहां इसका पैसा उसकी जेब में ही बहता है। लोगबाग इसलिए खरीदते हैं ताकि बेचकर मुनाफा कमा सकें। इसीलिए बाज़ार और भाव हमेशा चक्र में चलते हैं। उठने व गिरते रहते हैं। जापान का बाजार करीब बीस साल डूबता रहा। लेकिन भारत में संभावना है तो बढ़ेगा। अब गुरु का बाज़ार…औरऔर भी

आर्थिक मोर्चे से आ रही खबरें अच्छी नहीं हैं। शुक्र को खबर आई कि देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक फरवरी में 1.9% घट गया तो मार्च में निर्यात में भी 3.15% कमी आई। अब मंगल को खबर आ गई कि मार्च में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 5.70% और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 8.31% बढ़ी है। यह चिंता की बात है। लेकिन बाज़ार पर खास असर क्यों नहीं? अब देखते हैं आज का ट्रेड…औरऔर भी

दशकों पहले शेयर बाज़ार ब्रोकरों का बंद क्लब हुआ करता था। 1992 में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग आने से पहले तक वे अपनी चौपड़ी पर भाव नोट करके हल्ला मचाते थे। भाव भरोसे का खेल था। ब्रोकर जो बोले, वही भाव। लेकिन अब उनकी हर हरकत तो नहीं, लेकिन हर भाव सामने आ जाता है। मिनट-मिनट का भाव कंप्यूटर स्क्रीन पर। हमारा काम इन भावों को पकड़कर स्टॉक के पीछे की हरकत को समझना है। अब आज का ट्रेड…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश के दो तरीके हैं। पहला, कहीं किसी से, जान-पहचान वाले या टीवी पर एनालिस्ट से सुन लिया तो दांव लगा दिया। यह एक तरह की सट्टेबाज़ी है जो 100% नुकसान ही नुकसान करती है। आज देश के करीब दो करोड़ डीमैट खातों में से आधे से ज्यादा निष्क्रिय क्यों पड़े हैं? दूसरा तरीका है वैल्यू इनवेस्टिंग। इसमें कंपनी की अंतर्निहित ताकत को देखकर निवेश किया जाता है। तथास्तु में अब आज की कंपनी…औरऔर भी

जो बढ़ चुके हैं या जिनमें हर हाल में बढ़ने का दमखम है, उन्हें फिलहाल बेचकर मुनाफा कमाओ और जो थोड़ा रिस्की हैं, उथले हैं, उन्हें चढ़ाते जाओ ताकि बाज़ार के गिरते ही बेचकर अच्छा-खासा मुनाफा कमा लिया जाए। निफ्टी कल भले ही फ्लैट रहा हो, लेकिन निफ्टी मिडकैप 50 सूचकांक 1.88% बढ़ गया। बड़े खिलाड़ियों की यही रणनीति चल रही है इस समय। हम भी उनके नक्शे-कदम पर चलकर कमा सकते हैं। अब शुक्र का बाज़ार…औरऔर भी

दोस्तों! ट्रेडिंग का यह पेड कॉलम शुरू किए हुए आज पूरे एक साल हो गए। आपका पता नहीं, लेकिन मैं इस कॉलम से अभी तक संतुष्ट नहीं हूं। सच है कि भावी अनिश्चितता को मिटाना किसी के लिए भी संभव नहीं। लेकिन ट्रेडिंग की जितनी संभाव्य स्थितियां हो सकती हैं उनमें कम से कम रिस्क में अधिकतम रिटर्न की गिनी-चुनी स्थितियां ही अभी तक हाथ लगी हैं। अभी बहुत कुछ सीखना-सिखाना जरूरी है। अब गुरु की दिशा…औरऔर भी

पेन्नी स्टॉक्स के नाम पर आम निवेशकों को फंसाने का खेल समूची दुनिया में व्याप्त है। बीते हफ्ते बाकायदा मेरे नाम पर एक ई-मेल आया कि आरसीएचए नाम का स्टॉक खरीद लीजिए। शुक्रवार को यह 20 सेंट का था। हफ्ते भर में पांच गुना बढ़कर एक डॉलर हो जाएगा। वाकई दो दिन में 60% बढ़कर 34 सेंट पर पहुंच गया! लेकिन यह ट्रैप है, अभिमन्यु को मारने का चक्रव्यूह। अब रामनवमी के अवकाश के बाद की ट्रेडिंग…औरऔर भी

शेयर बाज़ार का ट्रेडर बहुत कुछ आम व्यापारी की तरह है। व्यापारी माल खरीदकर जुटाता है तो ट्रेडर स्टॉक्स। कम दाम पर खरीदकर ज्यादा पर बेचना दोनों का धंधा है। कभी-कभी व्यापारी गलत माल खरीद लेता है तो उसे डिस्काउंट पर निकाल देता है। कोशिश बराबर यही रहती है कि घाटे को काटते रहा जाए। यही सोच ट्रेडर की भी होनी चाहिए। पैसे बनाने से ज्यादा अहम है नुकसान से बचते रहना। अब आगाज़ नए सप्ताह का…औरऔर भी