रियल्टी क्षेत्र की हालत कुछ ज्यादा ही खराब है। हालांकि चंदे की लालची सरकार उसकी मदद में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही। फिर भी देश में अनबिके मकानों की संख्या दस लाख से ज्यादा है। इनकी कीमत 6 लाख करोड़ रुपए के आसपास है। अधिकांश डेवलपर वित्तीय फांस में जकड़े हैं। न तो वे इन्वेंटरी निकाल पा रहे हैं और न ही फाइनेंस के अभाव में अपने प्रोजेक्ट पूरे कर पा रहे हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में स्थिति यह है कि हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, रिलैक्सो फुटवियर, सीमेंस, नेस्ले, एवेन्यू सुपरमार्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, वोल्टाज, बाटा व अडानी ग्रीन एनर्जी जैसी मुठ्ठी भर कंपनियों ने 52 हफ्ते का नया शिखर पकड़ा है। पर, बाज़ार में तलहटी तक गिरी कंपनियों की संख्या चोटी तक चढ़ी कंपनियों से कम से कम छह गुनी ज्यादा है। बड़ों को लेने का फायदा नहीं। छोटों के डूबते चले जाने का खतरा है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

त्योहारों का मौसम। दिवाली का हफ्ता चालू है। बताते हैं कि अमेजॉन, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील पर जमकर सेल हो रही है। बॉलीवुड भी चमक रहा है। कुछ दिनों में ही मरजावां, हाउसफुल-4 और सांड की आंख जैसी कई फिल्में त्योहारी मूड को भुनाने के लिए बाज़ार में आ रही हैं। लेकिन गाड़ियों की बिक्री की मंदी टूट नहीं रही। घरों को खरीदनेवाले नहीं मिल रहे। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स व मोबाइल में खास बिक्री नहीं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

रिटेल या आम ट्रेडर को शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में केवल 5% बचत लगानी चाहिए। लेकिन जो ज्यादा नेटवर्थ वाले लोग (एचएनआई) हैं, जिनके पास इफरात धन है, वे अपने निवेश सलाहकार या वित्तीय प्लानर से पूछकर जितना भी चाहें, उतना धन ट्रेडिंग में लगा सकते हैं। वैसे, देखा गया है कि बाज़ार में ज्यादातर रिटेल ट्रेडर ही डूबते हैं, जबकि एचएनआई ट्रेडर अधिक न भी कमाएं तो उनकी पूंजी सुरक्षित रहती है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में जिसे ट्रेडिंग करनी है, उसे केवल अपना वही धन ट्रेडिंग में लगाना चाहिए जो अगर डूब जाए तो उसकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़े। बताते हैं कि आपके पास वर्तमान व भावी और आकस्मिक ज़रूरतों को पूरा करने के बाद 100 रुपए बचते हैं तो उसमें से केवल 5 रुपए ही वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में लगाने चाहिए। बाकी धन एफडी, सोना, म्यूचुअल फंड व स्टॉक्स में लगाना चाहिए। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

लालच में लोग इतने अंधे हो जाते हैं कि अपनी पूंजी के बाद घरवालों की जमापूंजी उड़ाने लगते हैं। इससे भी नहीं पूरा होता तो उधार लेने लगते हैं। उधार का यह सिलसिला वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग के लिए आत्मघाती है। उधार लेकर ट्रेडिंग करना नुकसानदेह ही नुकसानदेह है, फायदेमंद कतई नहीं। बैंक या संस्थाएं दूसरों के धन पर ट्रेडिंग करती हैं और उन्हें इससे घाटा नहीं होता, बल्कि पक्का कमीशन मिलता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

लालच, लिप्सा या तृष्णा हमारा विवेक हर लेती है, दिमाग बंद कर देती है, आंखों पर काला-घना परदा डाल देती है। लगता है कि चांद पेड़ की फुनगी पर ही बैठा है। सीढ़ी लगाकर या किसी तरह चढ़कर वहां पहुंच गए तो चांद अपनी मुठ्ठी में होगा। यह अगर ‘मैया मैं तो चंद्र खिलौला लइहौं’ जैसा बाल-हठ होता तो चल जाता। लेकिन बड़े ऐसा बचपना करने लग जाएं तो सर्व-सत्यानाश हो जाता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग जब तक पेशा है, तब तक ठीक है। लेकिन अगर वह नशा बन जाए तो सबसे पहले आपको बरबाद करती है और उसके बाद आपके परिवार को। कारण, वह आपकी लालच को हवा देती है जिसके चढ़ते ही केवल सफलता दिखाई देती है, विफलता नहीं। रिटर्न दिखाई देता है, रिस्क नहीं। लेकिन इस धंधे का रिस्क ऐसा है कि भगवान भी अगर आ जाए तो उसे मिटा नहीं सकता। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था के सुस्त पड़ने और आगे इसकी हालत बिगड़ते जाने की आशंका कतई निराधार नहीं है। मगर भारत की सुदीर्घ विकासगाथा का अंत अभी नहीं हुआ है और न ही अगले 10-15 सालों में होगा। हमारे यहां इतनी तगड़ी उद्यमशीलता है कि उसे अगर माकूल सरकारी नीतियों का साथ मिल जाए तो भारत 10 साल में चीन के समकक्ष और 15 साल में उससे भी आगे निकल सकता है। यह होकर रहेगा। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

अपने यहां कंपनियों के प्रवर्तक भी शेयर बाज़ार के अहम खिलाड़ी हैं। आखिर कंपनी के वर्तमान व भविष्य के बारे में उनसे बेहतर कौन जान सकता है। इधर जब भी बाज़ार में अफरातफरी मची है, तब यस बैंक जैसे अपवादों को छोड़ दें तो प्रवर्तकों ने घबराकर अपने शेयर नहीं बेचे हैं। इसके विपरीत तमाम प्रवर्तकों ने बाज़ार से शेयर खरीदकर कंपनियों में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ाई है। यह काफी शुभ लक्षण है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी