अर्थव्यवस्था के साथ-साथ हमारे कॉरपोरेट क्षेत्र की हालत भी खस्ता चल रही है। यह हकीकत रिजर्व बैंक की एक ताज़ा रिपोर्ट में स्वीकार की गई है। इस रिपोर्ट में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की 2696 कंपनियो का लेखा-जोखा लिया गया है। उसका कहना है कि इन कंपनियों का शुद्ध लाभ सितंबर 2019 की तिमाही में साल भर पहले से 54.3% कम रहा है। इसकी सीधी वजह उनके उत्पादों की मांग का काफी घट जाना है। अब सोमवार की दृष्टि…औरऔर भी

अपना स्वभाव समझना, अपनी भावनाओं का तंत्र जानना और शेयर बाजार के काम करने के तरीके व उसके पीछे के मनविज्ञान को समझना। इसी में छिपा है यहां से कमाने का सूत्र। साथ ही टेक्निकल एनालिसिस के कैंडल के रूप, उसके स्थान के महत्व, कुछ मूविंग औसत व आरएसआई जैसे चुनिंदा संकेतकों की भाषा समझनी पड़ती है। यह रॉकेट साइंस जैसा कठिन काम नहीं, बल्कि आसान है। सब कुछ साधा जा सकता है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से नियमित कमाना है तो बिजनेस चैनल देखने की आदत छोड़नी पड़ेगी। किसी स्टॉक में ट्रेडिंग के लिए रिटेल ट्रेडर को जितनी जानकारी चाहिए, वह उसके भावों में जज्ब होती है। इनसाइडर या अंदरूनी सूचनाओं पर आधारित ट्रेडिंग को छोड़ दें तो संस्थाएं भी भावों और उसके पीछे के मनोविज्ञान को समझ ट्रेड करती है। हम भी इस मनोविज्ञान को समझ लें तो बाज़ार से बराबर कमा सकते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए बाहर की सलाहें तभी तक ज़रूरी होती हैं, जब तक आपका आत्मविश्वास नहीं बन जाता। उसी तरह जैसे बच्चों की साइकिल में सीखते समय पीछे के पहिए के अगल-बगल दो छोटे पहिए लगे होते हैं। आत्मविश्वास जमने के बाद किसी एक्सपर्ट की सलाह की दरकार नहीं होती। गांठ बांध लीजिए कि अचूक सलाह देने का दावा करनेवाले दरअसल सलाह बेचने का धंधा कर रहे हैं, आपको फायदा पहुंचाने का नहीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जो जिंदगी सिखा देती है, वो किताबें कभी नहीं सिखा सकतीं। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग पर दुनिया के कितने भी सफल ट्रेडरों की किताब पढ़ लीजिए, टेक्निकल एनासिसिस का महंगे से महंगा कोर्स कर लीजिए, फिबोनाची नंबरों का सारा गणित सोख लीजिए, लेकिन बाज़ार से नियमित कमाई का कौशल आपको अपने अनुभव से ही सीखना होता है। फिर एक बार सीख लिया तो वह साइकल या कार चलाने जैसा आसान हो जाता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

डर और चिंता की भावना का कोई तुक-तर्क नहीं होता। उन्होंने घेर लिया तो किसी दूसरे के समझाना कोई काम नहीं आता। सारा पढ़ा-लिखा भूल जाता है। तनाव चढ़ता ही चला जाता है। इससे मुक्ति के लिए हमें खुद डर व चिंता की भंवर से निकलना पड़ता है। यह आसान नहीं। लेकिन आसान काम यह है कि हम जब भी चिंताग्रस्त या डरग्रस्त हों तो वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से एकदम दूर रहें। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बुद्धि के साथ रहना है है कि खुद को भावनाओं में बहकने से बचाना पड़ेगा। भावनाएं भी बहुत सारी नहीं। केवल लालच और डर की भावना को साधना है। साथ ही अपने अहं की भावना पर काबू पाना है। भावनाओं पर काबू पाने के लिए अपने स्वभाव को समझना ज़रूरी है। फिर इसे समझने के बाद उसमें आवश्यक बदलाव करने होंगे। तरीका यह भी है कि अपने स्वभाव के माफिक स्टॉक्स चुने जाएं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में सारा खेल अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए दूसरों की भावनाओं को समझने और उसका फायदा उठाने का है। यह सुनने में बड़ा निर्मम लगता है। लेकिन युद्ध और बाज़ार में ऐसी ही निर्ममता चलती है। दूसरों की भावना भावों के चार्ट पर दिख जाती है। चार्ट देखना आ जाए तो आपको साफ दिखने लगेगा कि कहां भावनाएं और कहां बुद्धि सक्रिय है। आपको हमेशा बुद्धि के साथ रहना है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

भावनाएं अस्थिर हों, किसी भी वजह से उनमें उबाल या सुस्ती आई हो तो हमारी बुद्धि नहीं काम करती। हम अधीर हो जाते हैं। यह ऐसी अवस्था है जब कोई भी वित्तीय बाज़ार में आपको शिकार बना सकता है, भले ही आप कितने बड़े महारथी क्यों न हों। इसीलिए नियम है कि जब भी घर-परिवार या दोस्तों से झगड़ा हुआ हो, तब ट्रेडिंग से दूर रहें। अन्यथा, आप अपना नुकसान कर बैठते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

भावनाओं का सारा समीकरण बाज़ार के भावों में दिख जाता है। इनका सारा ग्राफ भावों के दैनिक और साप्ताहिक चार्ट में झलकता है। ऊपर से कुछ दिन, हफ्तों, महीनों व सालों के मूविंग औसत का गणित बाज़ार में सक्रिय भावनाओं का सामूहिक पैटर्न बता देता है। दस-बीस साल पहले यह हिसाब-किताब लगाना बेहद कठिन था। आज सब कुछ कंप्यूटर के चंद बटन कर देते हैं। हमारा काम बुद्धि और धैर्य का इस्तेमाल है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी