आपको शेयर बाज़ार का प्रोफेशनल ट्रेडर बनना है तो बेहद अनुशासित व वैज्ञानिक सोच वाला बनना पड़ेगा। किसी की नकल से यहां अकल नहीं आ सकती। आपको अपनी विशेषताओं को समझकर उसी हिसाब से खुद का ट्रेडिंग सिस्टम विकसित करना होगा। भावनाओं के संवेग को हमेशा किनारे रखना होगा। शतरंज के खिलाड़ी की तरह हमेशा बुद्धि पर भरोसा रखना होगा। रिटेल ग्राहक की झपट्टामार प्रवृत्ति के बजाय थोक व्यापारी की सोच रखनी होगी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

आपका मुकाबला लाखों हुनरमंद, अनुभवी व सुविधा-सम्पन्न ट्रेडरों से है। इस बाज़ार में जो उन्नीस पर बीस पड़ेगा,  वही कमाएगा। अगर आपको लगता है कि यूं ही टहलते हुए जाएंगे और इन्ट्यूशन या किसी टिप्स की बदौलत उस्ताद शेर के जबड़े से शिकार छीन लेंगे तो यह आपकी गलतफहमी है। तय करें कि शेयर बाज़ार के किस हिस्से में आप दूसरों पर भारी पड़ सकते हैं और उसके अनुरूप अपनी धार विकसित करें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में लाखों सुलझे और अनुभवी ट्रेडर हैं। सबके पास कंप्यूटर, स्मार्ट-फोन व टैबलेट जैसे टूल्स हैं। अच्छी स्पीड का इंटरनेट कनेक्शन। चार्टिंग का बेहतरीन सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर का बड़ा-सा स्क्रीन। राकेश झुनझुनवाला ने तो पूरा कमरा ही बनवा रखा है जहां दीवार पर बड़ी-बड़ी स्क्रीन पर तमाम शेयरों की लाइव चाल दिखती रहती है। अल्गोरिदम का खेल भी ट्रेडरों का पता होता है। सभी दूसरे का धन खींचने में लगे हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के लिए यह संधि-सप्ताह है। चार दिन साल 2020 के। एक दिन साल 2021 का। चाहें तो पुरानी गलतियां पुराने साल में छोड़कर नए साल की नई शुरुआत इसी हफ्ते कर सकते हैं। याद रखें कि शेयर बाज़ार ऐसी जगह है जहां न्यूटन जैसे वैज्ञानिक भी गच्चा खाते रहे हैं। इसलिए ज़रूरी है कि हम न तो अपने भीतर हीनता-भाव रखें और न ही खुद के सर्वज्ञ होने का गुमान पालें। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

इस वक्त शेयर बाज़ार की हालत नाजुक है। अफवाह या किसी नकारात्मक खबर से उसे खुदा-न-खास्ता तगड़ा धक्का लगा तो संभालने के एफआईआई भी नहीं हैं। वे क्रिसमस की लंबी छुट्टियां मनाने निकल चुके हैं। सरकार किसान आंदोलन से परेशान है। वहीं, पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी सुस्त पड़ी है। पिछले कुछ महीनों में फ्रैंकलिन टेम्प्लेटन जैसे नामी म्यूचअल फंड और डेढ़ दर्जन ब्रोकरों के डिफॉल्ट हो गए। मगर सेबी शांत पड़ी रही। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

पिछले महीने लगातार दो बार वॉट्स-एप्प के ज़रिए अफवाह फैलाई गई कि निफ्टी व सेंसेक्स में शामिल बड़ी कंपनी के मालिक की सेहत बेहद नाज़ुक है। कंपनी ने इसका माकूल जवाब देकर अफवाह का समूल खात्मा कर दिया। पहले भी तेज़ी के दौर में अफवाहों से बाज़ार को गिराने की कोशिशें हो चुकी हैं। 1990 के दशक में तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे या खराब सेहत की अफवाहें फैलाई गई थीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ताश के पत्तों का महल बन चुके शेयर बाज़ार को झटका देश नहीं, विदेश से भी लग सकता है। पिछले हफ्ते तक वेब या सोशल मीडिया की अटकलबाज़ी चल रही थी। अब तो कोरोना के नए खतरनाक अवतार ने ब्रिटेन, इटली व नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों में धमक पैदा कर दी है। भारत समेत दुनिया के तमाम देशों ने ब्रिटेन से आनेवाली उड़ानें रद्द कर दी हैं। अफरातफरी का आलम गहराने लगा है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार हर दिन नए शिखर पर। निफ्टी 37.84 के रिकॉर्ड पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि सेंसेक्स 33.60 के पी/ई पर। एक रुपए के शुद्ध लाभ पर इतना दाम देने का कहीं कोई तुक या औचित्य नहीं दिखता। औसतन 20-22 का पी/ई अनुपात चलता है। लेकिन विदेशियों ने सस्ते धन से बाज़ार को पाटकर भयंकर असंतुलन पैदा कर दिया है। ऐसा असंतुलन, जिसमें जरा-सी अफवाह भयंकर अफरातफरी मचा सकती है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अमूमन दिसंबर तेजड़ियों का महीना रहता है। लेकिन जनवरी के साथ ऐसा नहीं है। अबकी बार तो और भी नहीं। दुनिया में तमाम राजनीतिक घटनाक्रम आसन्न हैं जो वित्तीय जगत व बाज़ार को प्रभावित कर सकते हैं। जनवरी में यकीनन शेयर बाज़ार में वोल्यूम बढ़ जाएगा। इंट्रा-डे वोलैटिलिटी तो अब भी बढ़ी हुई है। लेकिन तब दिन-ब-दिन की वोलैटिलिटी भी वापस लौट आएगी। ट्रेडरों और निवेशकों को तब अपनी चौकसी बढ़ा देनी होगी। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

इतना निवेश कर चुकने के बाद विदेशी निवेशक इस महीने धीरे-धीरे सुस्ती ओढ़ते जा रहे हैं। इससे बाज़ार में नकदी या लिक्विडटी के कम होते जाने का रिस्क बढ़ता जा रहा है। कैश और डेरिवेटिव सेगमेंट में घटते वोल्यूम में यह दिखने भी लगा है। वैसे, हर साल दिसंबर में ऐसा होता रहता है। इससे बड़े ट्रेडरों को ऑर्डर पूरा करने में काफी दिक्कत होती है। लेकिन छोटों पर खास फर्क नहीं पड़ता। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी