शेयर बाज़ार में पिछले 12-14 महीनों में करीब डेढ़ करोड़ नए-नवेले रिटेल ट्रेडर आए हैं। इन्हें भरोसा है कि यहां धन-दनादन होता है। उनके दिमाग पर तेज़ी का शुरूर छाया है। उन्होंने अभी तक बाज़ार की मंदी नहीं देखी। इनमें से ज्यादातर पिछले साल मार्च में तब बाज़ार में आए, जब वो कोरोना की मार से ज़मींदोज़ हो चुका था। उसके बाद अभी तक तेज़ी की बहार है। लेकिन अगर बाज़ार में मुनाफावसली की लहर दौड़ी औरऔरऔर भी

आज के दौर की सबसे बड़ी समझदारी यही है कि बेहद सतर्क रहें, हमेशा तगड़ा स्टॉप-लॉस लगाकर चलें। ऐसा इसलिए ज़रूरी है क्योंकि बाज़ार में इस वक्त 20-30 साल के युवा झूमकर आए हैं। इनके पास शेयरों में ट्रेडिंग का कोई अनुभव नहीं है और वे बुद्धि से ज्यादा भावनाओं में बहते हैं। खट से इधर तो खटाक से उधर। नतीजतन, बाज़ार कोई दिशा ही नहीं पकड़ पा रहा और उन्मत्त जानवर जैसा बर्ताव कर रहा है।औरऔर भी

लम्बे निवेश की बात अलग है। लेकिन शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में धन के प्रवाह के साथ बहेंगे, तभी कमा सकते हैं। विपरीत चले तो पूंजी गंवाते रहेंगे। इस समय हमारा बाज़ार चूंकि रिटेल ट्रेडरों की पिनक या सनक के साथ बह रहा है, इसलिए हर किसी को उनके मनोविज्ञान को समझकर चलना होगा। दिक्कत यह है कि वे समझदारी या बगैर किसी योजना के लालच या डर की भावना के वशीभूत होकर चलते हैं तो कैसेऔरऔर भी

पहले जहां साल भर में 40-50 लाख नए डीमैट एकाउंट खुला करते थे, वहीं पिछले 14 महीनों में करीब 1.50 करोड़ नए डीमैट एकाउंट खुले हैं। इन्हें मिलाकर बीएसई के डेटा के मुताबिक देश में कुल डीमैट खाताधारकों की संख्या 7.06 करोड़ हो चुकी है। ये लोग 10-20, 50-100 शेयर या डेरिवेटिव सेगमेंट में अधिकतम दो-चार लॉट ही खरीदते हैं। लेकिन कई करोड़ निवेशकों/ट्रेडरों की ऐसी छोटी खरीद भी मिलकर विशाल हो जाती है। इसका प्रभाव शेयरोंऔरऔर भी

कोरोना के प्रकोप और लॉकडाउन ने हमार शेयर बाज़ार का स्वरूप ही बदल दिया है। पहले जहां रिटेल ट्रेडरों का रोल हाशिये पर था, वहीं अब वे काफी निर्णायक हो गए हैं। खासकर, डेरिवेटिव सेगमेंट में तो वे एफआईआई, डीआईआई व ब्रोकरों की प्रॉपराइटरी फर्मों से भी बड़े खिलाड़ी बन गए हैं। मसलन, शुक्रवार की ट्रेडिंग पर नज़र डालें तो एनएसई के डेरिवेटिव सेगमेंट में कुल 73.13 लाख लॉन्ग सौदे हुए, जिसमें से 43.65 लाख सौदे (59.69%)औरऔर भी

निफ्टी में ऊपर के पांच-सात स्टॉक्स संभाल लिए जाएं और चुनिंदा खरीद से उन्हें चढ़ाते रहा जाए तो शेयर बाज़ार बराबर बढ़ता ही रहेगा। यही खेल अकेले वित्तीय सेवाओं के बल पर भी कर सकते हैं क्योंकि उनका सम्मिलित वजन निफ्टी में 38.06% है। वहीं, रिलायंस (10.36%), एचडीएफसी बैंक (9.79%), इनफोसिस (7.66%), एचडीएफसी (6.82%) और आईसीआईसीआई बैंक (6.80%) का सम्मिलित वजन 41.43% हो जाता है। इन पांच के ऊपर दो स्टॉक्स (टीसीएस, कोटक महिंद्रा बैंक) और जोड़औरऔर भी

एनएसई अपनी वेबसाइट पर हर महीने के आखिर में निफ्टी-50 सूचकांक के 50 स्टॉक्स का नया भार जारी करता है। वहां अभी मई 2021 की पीडीएफ फाइल मौजूद है। जून महीने के अंत में जब नया डेटा जारी होगा तो उसकी भी पीडीएफ फाइल डाउनलोड करके दोनों की तुलना कर सकते हैं। स्टॉक्स के वेटेज कैसे बदलते हैं, इसे उदाहरण से समझते हैं। मई में रिलायंस का शेयर 8.31% बढ़ा तो निफ्टी-50 में इसका भार 10.19% सेऔरऔर भी

बाज़ार में दिलचस्पी रखनेवाला अदना-सा शख्स भी पूछता फिरता है कि बाज़ार अभी किधर जाएगा, बिना यह जाने-समझे कि बाज़ार है क्या! सेंसेक्स या निफ्टी की चाल को ही बाज़ार माना जाता है। अब चूंकि सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों निफ्टी-50 में शामिल हैं, इसलिए अपडेट रहनेवाले समझदार लोग निफ्टी की दशा-दिशा को ही बाज़ार का परिचायक मानने लगे हैं। लेकिन उनमें से भी कम लोगों को पता है कि निफ्टी में शामिल 50 स्टॉक्स का वजनऔरऔर भी

ट्रेडिंग के आंगन में कदम रखते ही हर कोई टेक्निकल एनालिसिस की तरफ भागता है, जैसे हर लुटेरा ऱाजनेता बनने के लिए दिल्ली की तरफ भागता है। एकदम नौसिखिया ट्रेडर भी सपोर्ट, रेजिस्टेंस, आरएसआई, एमएसीडी और मूविंग एवरेज की बातें फर्राटे से करता है। लेकिन जो ठीक खुली आंखों से सामने दिख रहा है, उसे ही नहीं देखता। तीन साल पहले चर्चित हुई केरल की युवा अभिनेत्री प्रियाप्रकाश वारियर की तरह भौहें इधर-उधर उठाकर पूछता कि बाज़ारऔरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग का कौशल हासिल करने के लिए आपको साफ-साफ पता होना चाहिए कि कोई सौदा आप क्यों कर रहे हैं। जब तक आप किसी सौदे को भलीभांति समझेंगे नहीं, तब तक आप में इतना आत्मविश्वास नहीं आ सकता कि आप उस पर मजबूती से अमल करें और दांव चूक जाने से उससे काम का सबक हासिल कर सकें। आपको ट्रेडिंग के लिए ज्ञान व सूचनाओं का अपना पूरा डेटाबेस एकदम चाक-चौबन्द रखना होगा। तभीऔरऔर भी