पुश्तैनी पेशे का जमाना अब नहीं रहा। सोनार का बेटा, लोहार का बेटा लोहार या किसान का बेटा किसान बनें, जरूरी नहीं। फिर धर्म क्यों पैतृक संपदा या पुश्तैनी जागीर के रूप में हम पर मढ़ दिया जाता है?और भीऔर भी

हर धर्म दावा करता है कि उसकी मान्यताएं वैज्ञानिक हैं। लेकिन धर्म स्थिर है जबकि विज्ञान अपनी ही स्थापनाओं को तोड़ता बढ़ता जा रहा है। सोचिए, किसी दिन विज्ञान ही धर्म बन गया तो!और भीऔर भी

नैतिकता की दुहाई कमजोर लोग देते हैं। धर्म, समाज व राजनीति के ठेकेदारों के लिए यह लोगों को भरमाने का एक जरिया है जिसका नाम जपते हुए वे खुद जघन्य से जघन्य काम किए जाते हैं।और भीऔर भी