सरकार ने खुद को लकवा का शिकार कहने को सरासर गलत बताया है। उसके बचाव का मोर्चा संभाला है गृह मंत्री पी चिदम्‍बरम और संसदीय कार्य व जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल ने। उन्हीं के शब्दों में, “यह कहना कि सरकार को लकवे ने जकड़ रखा है, पूरी तरह से ग़लत, अस्‍वीकार्य और बेतुका तर्क है।” इन मंत्रीगणों से गुरुवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में उन विधेयकों के बारे में विस्तार सेऔरऔर भी

बाजार को मनचाहे अंदाज में नचानेवालों के लिए आज से बेहतर कोई दूसरा दिन हो नहीं सकता था। ब्याज दर में ज्यादा से ज्यादा 0.25 फीसदी वृद्धि की अपेक्षा थी। लेकिन असल में यह निकली 0.50 फीसदी। इसे रोलओवर के पहले बाजार को तगड़ा झटका देने के इस्तेमाल किया गया। हालांकि बाजार ने पिछले दो हफ्तों में हासिल सारी बढ़त एक झटके में खो दी है। लेकिन निश्चित तौर पर बाजार की अंतर्धारा नहीं बदली है। केवलऔरऔर भी

रिजर्व बैंक अभी तक हर तीन महीने पर मौद्रिक नीति की समीक्षा पेश करता रहा है। लेकिन अब वह हर डेढ़ महीने/छह हफ्ते पर ऐसा करेगा। हां, बैंकरों के साथ बैठक और प्रेस कांफ्रेंस पहले की तरह साल भर में अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी में चार बार ही होगी। 2005 तक रिजर्व बैंक साल में केवल दो बार अप्रैल व अक्टूबर में मौद्रिक नीति पेश करता था। अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व भी हर छहऔरऔर भी

कहां तो विश्लेषक मानकर चल रहे थे कि मई में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 16 फीसदी बढ़ेगा और कहां असल में यह 11.5 फीसदी ही बढ़ा है। यह पिछले सात महीनों का सबसे निचला स्तर है। लेकिन इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वित्त सचिव अशोक चावला का कहना है कि किसी को भी यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि औद्योगिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लंबे समय तक असामान्य दरों पर बढ़ता रहेगा। इसके सामने क्षमता की सीमाएं हैं।औरऔर भी

अगर कोई नीति कभी भी लागू नहीं हो पा रही है तो पक्की बात है कि उस नीति में कोई बुनियादी खामी है। इसलिए जो कानून लागू नहीं हो पा रहे हैं, उनमें यह तलाशने की जरूरत है कि उनका नट-बोल्ट कहां से ढीला है।और भीऔर भी