हमारे-आप जैसे बहुत सारे लोग फ्यूचर्स व ऑप्शंस में ट्रेड करते हैं, वो भी निफ्टी के फ्यूचर्स/ऑप्शंस में और लालच में फंसकर अक्सर पिटते हैं। वैसे, एफ एंड ओ की सूची से हम ट्रेडिंग करनेवाले शेयरों का चुनाव कर सकते हैं। एनएसई में रोजाना लगभग 1500 कंपनियों में ट्रेडिंग होती है, जबकि एफ एंड ओ की लिस्ट में करीब 145 कंपनियां हैं। इनमें से 10-15 को हम कैश ट्रेडिंग के छांट सकते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

यांत्रिक लीवर कम ताकत लगाकर ज्यादा भार उठाता है। इसी से निकला है लीवरेज़, वित्तीय बाज़ार में जिसका मतलब होता है कम धन या मार्जिन लगाकर ज्यादा कमाने का मौका। यह डेरिवेटिव्स, खासकर फ्यूचर्स में चलता है। मान लें, किसी स्टॉक में 5% मार्जिन है और वो 1% बढ़ता है तो आपका असल फायदा 20% होता है। पर गिरने पर घाटा भी इतना तगड़ा होता है। भरपूर रिस्क तो भरपूर फायदा। आइए अब चलाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

एक आम ट्रेडर होने के नाते न तो आपके पास बड़े-बड़े स्क्रीन हैं, न ही बहुत तेज़ कनेक्शन या उन्नत चार्टिंग सॉफ्टवेयर जो पलक झपकते सारी तस्वीर साफ कर दे। पूंजी भी ज्यादा नहीं। इसके बावजूद सामनेवाले पर बीस पड़ना है तभी ट्रेडिंग से कमा सकते हैं। इसके लिए एक अंतर्दृष्टि बनाने की ज़रूरत है जिसे हासिल आपको ही करना है। हम इसमें बस आपका सहयोग करते और अभ्यास कराते हैं। अब परखते हैं मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

सच्चा दोस्त वह है जो आपको संकट में डूबने नहीं देता। लेकिन धंधे में सगा भाई तक सगा नहीं होता! फिर, ब्रोकर, कंपनी या सलाहकार लाख ‘कस्टमर फर्स्ट’ का दावा करें, दरअसल उनका अपना फायदा ही सर्वोपरि होता है। इसलिए धंधे में आपको खुद ही अपना सच्चा दोस्त चुनना होता है। ट्रेडिंग में ऐसा ही सच्चा दोस्त है स्टॉप-लॉस जो आपको बचाता है और घाटे की दलदल में धंसने नहीं देता। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अमिताभ बच्चन से लेकर सचिन तेंदुलकर तक को भगवान माननेवालों की कमी नहीं। पर हकीकत यही है कि किसी को भी भगवान मानने से अपना भला नहीं होता, भले ही उनकी मार्केटिंग वालों का भला हो जाए। इसी तरह ट्रेडिंग में भावों को भगवान माना जाता है। मगर, वास्तव में भाव कंपनी का सच नहीं, ट्रेडरों की भावनाओं का सच दिखाते हैं। इसीलिए हताशा और उन्माद के पेन्डुलम पर झूलते हैं। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार बजट के खुमार में जितना चढ़ा था, उतना उतर चुका है। बजट के दो दिन पहले 26 फरवरी को निफ्टी 8683.85 पर बंद हुआ था। कल इससे थोड़ा नीचे जाने के बाद 8699.95 पर बंद हुआ। इस दौरान दस ट्रेडिंग सत्रों में निफ्टी नीचे में 8669.45 से ऊपर में 9119.20 तक गया। 449.75 अंक या 5.19% का अंतर! ऐसी लहरें बाज़ार में आती-जाती रहती हैं और कुशल ट्रेडर इसका फायदा उठाते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

जीवन का सारा ज्ञान-विज्ञान जो हो चुका है, उसकी तह में पैठने से निकलता है। इसके आधार पर आगे जो हो सकता है, उसका अनुमान लगाया जाता है। यह अनुमान सही हो सकता है और गलत भी। गलत हुआ तो नए मिले तथ्यों के आधार पर नई परिकल्पना या हाइपोथिसिस की जाती है और परीक्षणों पर उसे कसकर नया ज्ञान-विज्ञान निकाला जाता है। ट्रेडिंग को भी साधने की यही प्रक्रिया है। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार इस मामले में आम बाज़ारों से अलग है कि यहां भाव गिरने पर खरीदार भी बिकवाल बन जाते हैं और बाज़ार गिरता जाता है। वहीं, आम बाज़ार में माल का दाम गिरने पर खरीदनेवाले बढ़ जाते हैं। दरअसल वित्तीय बाज़ार में भाव आशा या निराशा के चलते बढ़ते-घटते हैं। यहां अलग किस्म की भावना काम करती है। सफल ट्रेडर भाव को भावना से मुक्त करके देखता है। कोशिश करें अब मंगलवार की नब्ज पकड़ने की…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में देश-विदेशी संस्थाओं के अलावा एनआरआई, एचएनआई और ब्रोकर हाउस भी ट्रेड करते हैं। इनकी खरीद-बिक्री से ही बाज़ार की दशा-दिशा तय होती है। लेकिन वे क्या कर रहे हैं, यह हम पहले से पता लगाने के चक्कर में पड़े तो पक्का धोखा खाएंगे। वे जो कुछ करते हैं, वह रोज़ाना भावों के चार्ट में खुलकर सामने आ जाता है। हमारा काम इन भावों से भावी दिशा को भांपना भर है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

सुबह-सुबह रिजर्व बैंक ने अचानक जब ब्याज दर 0.25% घटाकर 7.5% कर दी तो बाज़ार उछल पड़ा। सेंसेक्स 30,000 और निफ्टी 9100 के पार चला गया। लेकिन तभी मुनाफावसूली का ऐसा सिलसिला चला कि सेंसेक्स 0.72% और निफ्टी 0.82% गिरकर बंद हुआ। इससे एक ही बात साफ होती है कि खबरों और भावों में रिश्ता तो है, मगर सीधा नहीं। भाव खरीद और बिक्री के संतुलन से ही तय होते हैं। अब पकड़ते हैं गुरु की दृष्टि…औरऔर भी