भावों की सुनो, बाज़ार तुम्हारी सुनेगा
काश! कुछ पकापकाया मिल जाता! हम हमेशा शॉर्टकट के चक्कर में पड़े रहते हैं। चिपक लेते हैं बिजनेस चैनलों से। लिपे-पुते एंकरों और तथाकथित विशेषज्ञों की सुनते हैं जो परले दर्जे के धंधेबाज़ हैं। किसी अचूक मंत्र की तलाश में हम उनका उगला जहर अमृत समझकर पीते रहते हैं। लेकिन ध्यान रखें; कोई क्या कहता है, यह महत्वपूर्ण नहीं। महत्वपूर्ण यह है कि भाव क्या कहता है, डेटा क्या कहता है। अब चलाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
