काश! कुछ पकापकाया मिल जाता! हम हमेशा शॉर्टकट के चक्कर में पड़े रहते हैं। चिपक लेते हैं बिजनेस चैनलों से। लिपे-पुते एंकरों और तथाकथित विशेषज्ञों की सुनते हैं जो परले दर्जे के धंधेबाज़ हैं। किसी अचूक मंत्र की तलाश में हम उनका उगला जहर अमृत समझकर पीते रहते हैं। लेकिन ध्यान रखें; कोई क्या कहता है, यह महत्वपूर्ण नहीं। महत्वपूर्ण यह है कि भाव क्या कहता है, डेटा क्या कहता है। अब चलाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

चलते-फिरते लोग अक्सर पूछते हैं कि बाज़ार अब किधर जाएगा, बढ़ेगा या गिरेगा? ट्रेडर के लिए न तो इस सवाल का कोई मतलब है, न ही इसके जवाब का। बाज़ार बढ़े या गिरे, उसे तो कमाने की जुगत चाहिए। बढ़े तो लॉन्ग, गिरे तो शॉर्ट से। उसका मतलब इससे ज़रूर होता है कि सूचकांक या कोई स्टॉक कितना घट-बढ़ सकता है क्योंकि इसके आधार वो मुनाफे की रणनीति बना सकता है। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

जब भी आप किसी भी वजह से तनाव में हों तो उस दौरान ट्रेडिंग कतई नहीं करनी चाहिए। एकदम तनावमुक्त रहें, तभी वाजिब फैसले ले सकते हैं। गणना गलत निकल जाए तो स्टॉप-लॉस से उसे संभाल सकते हैं। लेकिन तनाव में रहे तो अपनी सीमा नहीं समझ में आएगी। कुछ जानकार कहते हैं कि ट्रेडिंग में मजा आए तभी उसे करना चाहिए। अन्यथा बराबर तनाव के चलते आप गलत फैसले ले सकते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

भावों ने जो चाल पकड़ रखी है, वो ज़रूरी नहीं कि आगे भी जारी रहे। यही टेक्निकल एनालिसिस की सीमा है। किस भाव पर कोई शेयर ट्रेड हुआ, यह महत्वपूर्ण है। लेकिन किस भाव पर ट्रेड नहीं हो सका या हुआ भी तो बहुत थोड़े समय, यह देखना कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। हम संस्थाओं की डिमांड व सप्लाई के असंतुलन को समझकर इन्हीं नाजुक भावों को पकड़ने की कोशिश करते हैं। अब परखते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

आदर्श बाज़ार के बारे में मान्यता है कि वहां सारी सूचनाएं सबको समान रूप से समान समय पर उपलब्ध होती हैं और वो एकदम दक्षता से सही मूल्य खोज निकालता है। लेकिन आदर्श और व्यवहार का फर्क जीवन की अमिट सच्चाई है। 24 नहीं, 22 या उससे कम कैरेट के सोने से ही गहना बनता है। सूचनाओं, खबरों तक पहुंच के इसी अभाव को हम टेक्निकल एनालिसिस जैसे तरीकों से भरते हैं। अब आजमाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में भाव हमेशा बराबरी पर छूटते हैं। बेचने और खरीदने वालों की संख्या अलग-अलग हो सकती है। लेकिन किसी भाव पर जितने शेयर बेचे जाते हैं, उतने ही खरीदे जाते हैं, तभी जाकर सौदा संपन्न होता है। मगर, भाव/बाज़ार की दशा इससे तय होती है कि वहां बेचने की व्यग्रता ज्यादा है या खरीदने की। अभी तो जो हाल है, उसमें अधिकांश लोग फटाफट मुनाफा कमाकर निकल लेना चाहते हैं। अब परखें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

हमारे एक परिचित दोस्त ने, जो दूसरों से कैश सेगमेंट ही नहीं, ऑप्शंस व फ्यूचर्स तक में ट्रेडिंग कराते थे, खुद अचानक ट्रेडिंग छोड़ दी। कहने लगे: यह मोटी पूंजीवालों का काम है, अपना नहीं। बात सही है। लेकिन पूंजी के साथ दो चीजें वित्तीय बाज़ार में सफल ट्रेडिंग के लिए बहुत ज़रूरी हैं। एक, स्पष्ट ट्रेडिंग रणनीति। दो, उस पर अनुशासनबद्ध अमल। ये दोनों चीज़ें हरेक को खुद विकसित करनी पड़ती हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

जो डर गया, समझो मर गया। वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग करनेवालों के लिए यह अकाट्य सच है। कारण, डर की मानसिकता में सही व संतुलित फैसला मुमकिन नहीं। इसलिए, अगर आप किसी वजह से परेशान, तनावग्रस्त या भयभीत हैं तो कुछ वक्त ट्रेडिंग से दूर रहें। डर से बचने का जमकर आजमाया तरीका यह है कि किसी सौदे में इतना लगाओ ही मत कि उसके डूबने से आपका दिल डूब जाए। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में कुशल ट्रेडर का काम होता है लोगों की सोच को पकड़ते रहना। लेकिन लोग कोई मशीन नहीं कि हमेशा एक ही तरह से सोचें। साथ ही प्रोफेशनल ट्रेडर भी अपना तरीका अक्सर बदलते रहते हैं ताकि दूसरे उन्हें पकड़ नहीं सके। इसलिए ट्रेडर को बराबर अपनी रणनीति को मांजते रहना पड़ता है। उसे आम ट्रेडरों की सोच को समझना और प्रोफेशनल ट्रेडरों की दिशा पकड़कर कमाना होता है। अब परखते हैं गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

एक के बाद एक, लगातार स्टॉप-लॉस लगता जाए तो जान सूख जाती है। लेकिन उनकी नहीं, जिन्होंने ट्रेडिंग में सफलता के सूत्र, बुद्धत्व को पा लिया है। दरअसल, स्टॉप-लॉस ट्रिगर हो गया तो समझना चाहिए कि हमारा अनुशासन काम आ गया। अन्यथा, हम घाटे की दलदल में धंस जाते। बढ़ते बाज़ार में थोड़े वक्त की गिरावट आती है तो लॉन्ग सौदेवालों का हश्र यही होता है। लेकिन शॉर्ट में तो ज्यादा फंसान है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी