कोई भी साधन अपने आप में साध्य नहीं होता। इसी तरह टेक्निकल एनालिसिस खुद में कोई अमोघ अस्त्र नहीं है। उसका काम बाज़ार में चल रहे भावों के पीछे की भावना को समझना है। वह बाज़ार के पीछे चलती है, आगे नहीं। ऐसे में जब एसोसिएशन ऑफ टेक्निकल मार्केट एनालिस्ट के अध्यक्ष सुशील केडिया कहते हैं कि निफ्टी 7700 और रुपया प्रति डॉलर 57 तक जाएगा तो उनका बड़बोड़ापन ही इसमें झलकता है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

दुनिया के बांड बाज़ार में बड़ी उथल-पुथल मची है। रिटेल ट्रेडर बांड बाज़ार पर ध्यान नहीं देते। लेकिन अपने यहां बांड बाज़ार के कम विकसित होने के बावजूद देशी ही नहीं, विदेशी संस्थाएं तक इसमें जमकर खेलती हैं। हालांकि अपने शेयर बाज़ार में भी यही संस्थाएं असली रुख तय करती हैं। अच्छी खबर यह है कि विदेशी संस्थाएं इधर ठंडी पड़ रही हैं तो बड़ी भारतीय संस्था एलआईसी ने मोर्चा संभाल लिया है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

अब तक जिन भी ट्रेडरों से मिला हूं, ज्यादातर बराबर हैरान-परेशान दिखते हैं। फोन से लेकर सोशल मीडिया तक बोलते-बतियाते रहते हैं कि निफ्टी कहां जाएगा या कोई स्टॉक कहां तक मार करेगा। लगता है जैसे हरेक पल उन्हें किसी थ्रिल की ज़रूरत है। बिना डायरेक्टर के ‘एक्शन’ बोले हमेशा एक्शन में लगे रहते हैं। यह एक तरह की बीमारी है। हमें ट्रेडिंग में कामयाब होना है तो इस बीमारी से बचना होगा। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार हमेशा चक्रों में चलते हैं। तभी उसमें धन का प्रवाह बराबर बना रहता है। खबरें इस प्रवाह को चलाते रहने का बहाना हैं। फिर, अब तो दुनिया इतनी बड़ी हो गई है, ग्लोबल हो चुकी है कि अच्छी-बुरी खबरों का कोई टोटा नहीं रहता। उतार-चढ़ाव का चक्र न रहे तो ट्रेडिंग का धंधा ही बैठ जाएगा, बाज़ार में लिक्विडिटी या तरलता सूख जाएगी। यह बुनियादी सच समझना ज़रूरी है। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

टेक्निकल एनालिसिस के तमाम इंडीकेटर अपने-आप में अधूरे हैं क्योंकि वे अब तक जो हो चुका है, उसी से निकला संकेत देते हैं। इसीलिए उन्हें लैंगिग इंडीकेटर कहा जाता है। लेकिन ठीक पिछली कैंडलस्टिक की बनावट और भावों के स्तर के साथ उन्हें मिला दें तो भविष्य के प्रबल संकेतक बन जाते हैं। कल हमारे सुझाए इमामी लिमिटेड में यही कमाल दिखा, जब उसने एक ही दिन में हफ्ते का लक्ष्य पा लिया। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में रोज़-ब-रोज़ के भाव खबरों से प्रभावित होते हैं। लेकिन अगर हम दिन बढ़ाते जाएं तो तात्कालिक खबरों का असर कम हो जाता है। इसी रिस्क को कम करने के लिए हम स्विंग, मोमेंटम या पोजिशन ट्रेड का सहारा लेते हैं। बहुत से प्रोफेशनल ट्रेडर तो जिस दिन खबर रहती है, ट्रेड ही नहीं करते। कुछ तो साल में 20-25 दिन ही ट्रेड करके अपना निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लेते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार बंद होने के बाद आंकड़े आए कि अप्रैल में रिटेल मुद्रास्फीति चार महीनों के न्यूनतम स्तर 4.7% पर आ गई। लेकिन मार्च में देश का औद्योगिक उत्पादन बढ़ने की रफ्तार सुस्त पड़कर 2.1% हो गई। कल के बारे में कहा जा रहा है कि चूंकि भूमि अधिग्रहण और जीएसटी जैसे विधेयक फिलहाल टल गए हैं, इसलिए बाज़ार इतना ज्यादा गिर गया। फिर, बाहर से ग्रीस का संकट भी मंडरा रहा है। अब चलाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

खरीदारी ज्यादा तो बाज़ार बढ़ता है और बिकवाली ज्यादा तो बाज़ार गिरता है। खरीदारी, बिकवाली का ज्यादा होना बाज़ार में सक्रिय निवेशकों या ट्रेडरों, खासकर संस्थाओं के भावी आकलन व रुख से तय होता है। बाज़ार लगातार दूसरे दिन बढ़ गया तो दूर की कौड़ी फेंकी जाने लगी कि चूंकि चीन ने ब्याज दर घटा दी है, इसलिए रिजर्व बैंक 2 जून को अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दर घटा सकता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बराबर तनाव से दूर रहे। भावनाओं पर अंकुश रखा। किसी के कहने में नहीं आए। खुद सारी गणना की, हिसाब-किताब लगाया। फिर भी सौदा जैसा सोचा था, उसकी उल्टी दिशा में चला गया। ऐसा होने पर अपनी किस्मत को दोष मत दीजिए क्योंकि हर किसी के साथ यही सब होता है। बाज़ार या भविष्य कभी किसी के इशारों पर नहीं चलता। इसीलिए यहां रिस्क को संभालने की रणनीति अपनाई जाती है। अब देखते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी

भावनाएं किसी को भी दीवाना बना देती हैं। लेकिन दीवानगी किस्से-कहानियों में चलती है, दुनियादारी में नहीं। खासकर, वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में तो कतई नहीं। यहां सफलता का सूत्र है कि ट्रेड में भावनाओं को कभी भी एंट्री न लेने दें। अन्यथा वह आपका सारा बना-बनाया खेल बिगाड़ देगी। यहां जो भी भावनाओं में बहते हैं, वे शिकार बनते हैं और उनका शिकार वे करते हैं जो भावनाओं को साधते हैं। अब करें शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी