यहां भावुक हारते, बुद्धिमान जीतते हैं
शेयरों के भाव कभी सीधी रेखा में नहीं, बल्कि लहरों जैसे चलते है। इन लहरों पर अच्छी सवारी गांठनेवाले लोग कमाते हैं, वहीं बिना सोचे-समझे लहरों पर कूदनेवाले डूब जाते हैं। एक और अकाट्य सच है कि भले ही ट्रेडिंग से कंपनियों के शेयरों के भावों की खोज होती है, लेकिन ट्रेडरों के लिहाज से इसमें दरअसल भावुक लोगों की जेब से धन निकलकर बुद्धिमान लोगों की जेब में जाता है, ज़ीरो-सम गेम। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
