चाहे शेयर हो, कमोडिटी हो या फॉरेक्स बाज़ार। सब जगह एक ही हाल है। प्रोफेशनल ट्रेडर, बैंक, वित्तीय संस्थाएं व ब्रोकरेज़ हाउस वहां से कमाते हैं। बाज़ार गिर जाए, तब भी कमाते हैं। वहीं 99% रिटेल ट्रेडर बाज़ार बढ़ने के बावजूद गंवाते हैं। बीते वित्त वर्ष 2015-16 में सेंसेक्स 10.33% गिरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी ने शेयर बाजार से कितना कमाया है? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

आर्थिक विकास चल निकला तो शेयर बाज़ार भी चढ़ने लगेगा। जानकारों के बीच माना जा रहा है कि जून तक बीएसई सेंसेक्स 26,135 तक और दिसंबर तक 28,000 पर पहुंच सकता है। इसी दौरान निफ्टी पहले 8000 और फिर साल के अंत में 8500 तक पहुंच सकता है। यह अधिकांश विश्लेषकों व अर्थशास्त्रियों की राय है। पर ध्यान रहे कि ऐसी राय के पीछे खालिस विज्ञान नहीं, बल्कि ढेर सारे पूर्वाग्रह होते हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

पूंजी की लागत घटने से देश में औद्योगिक निवेश बढ़ता है। आम लोगों के साथ ही कंपनियों के लिए ऋण लेना थोड़ा सस्ता पड़ता है। इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। इस गति से शेयर बाज़ार को आवेग मिलता है। यही आशावाद अब बढ़ता नज़र आ रहा है। तमाम अर्थशास्त्री और विशेषज्ञ मानते हैं कि आगे शहरों से लेकर गांवों तक मांग बढ़ सकती है क्योंकि इस बार अच्छे मानसून का अनुमान है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

रिजर्व बैंक ने नए वित्त वर्ष का आगाज़ बड़े सधे अंदाज़ में किया। बैंक जितने ब्याज पर उससे उधार लेते हैं, उस रेपो दर को 0.25% घटाकर 6.5% कर दिया। वहीं, बैंक उसके पास जमाधन पर जितना ब्याज पाते हैं उस रिवर्स रेपो दर को 0.25% बढ़ाकर 6% कर दिया। उसने मनी मार्केट या कॉल मनी बाज़ार की रेंज 1 से घटाकर 0.5% करने की कोशिश की है। नतीजतन, पूंजी की लागत घटेगी। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अर्थशास्त्रियों से लेकर बाज़ार तक ने तय मान रखा है कि आज 11 बजे रिजर्व बैंक रेपो या ब्याज दर 0.25% घटा कर 6.75% से 6.5% कर देगा। साथ में सीआरआर और एसएलआर थोड़ा कम किया जा सकता है ताकि बैंकों के पास कैश की उपलब्धता बढ़ जाए। रिजर्व बैंक ने इतना किया तो बाज़ार सामान्य रहेगा या बिकवाली आ सकती है। इससे ज्यादा हुआ तो बाज़ार चौंककर उछल सकता है। अब मंगलवार की दृष्टि से आगे…औरऔर भी

यह हफ्ता खबरों और उम्मीदों का है। वित्त वर्ष 2016-17 की पहली मौद्रिक नीति मंगलवार को आएगी। पांच राज्यों के चुनाव शुरू हो रहे हैं। इसलिए हम खबरों तक सीमित रहेंगे। लेकिन बड़े से लेकर छोटे शहरों तक आम ट्रेडरों में फैली यह धारणा तोड़नी ज़रूरी है कि कोई दूसरा उन्हें कमाकर दे सकता है। लोगबाग अक्सर पूछते हैं कि इंट्रा-डे में कितना कमाकर दे सकते हो? इस सोच में बुनियादी खोट है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अपने दिलो-दिमाग में कहीं गहरे बैठा लीजिए कि वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग सटीकता का नहीं, प्रायिकता का खेल है। यहां कुछ भी 100% पक्का नहीं। हो सकता है कि किसी शेयर में 80% बढ़ने का चांस हो और कहीं मामला 50-50% पर अटका हो। प्रायिकता का हिसाब ही बता सकेगा कि किसमें बिकवाली के आसार 60% या ज्यादा हैं और कौन-सा शेयर कुछ दिन में रपट सकता है। अब वित्त वर्ष 2016-17 के पहले दिन का अभ्यास…औरऔर भी

जो आपकी भावनाओं के दम पर शिकार करने निकले हैं, उनके शिकार बन गए तो आपका भला कभी नहीं हो सकता। स्टॉक एक्सचेंज जितनी जानकारी दे देते हैं, ट्रेडिंग के लिए उससे ज्यादा सूचना की ज़रूरत कभी नहीं होती। फिर भी बिजनेस चैनलों को सुबह से रात तक छुनछुना बजाना है तो वे कोई न कोई नाटक करते ही रहते हैं। उनके मालिकों व एंकरों के धंधे अलग हैं, डीलिंग-सेटिंग तगड़ी होती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

कोई भी बिजनेस दिन में सपने देखने से नहीं चलता। उसके लिए सारा कुछ जोड़-घटाकर देखना पड़ता है कि कितनी लागत पर कितनी मुनाफा कमाया जा सकता है। जोखिम है तो कितना और उसे कैसे कम से कम किया जा सकता है। जो मछलियां आसान चारे की लालच में फंसती हैं वे फौरन किसी का शिकार बन जाती हैं। इसलिए उचित होगा कि बाज़ार का स्वभाव समझें और उसके हिसाब से ट्रेड करें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जहां लाखों लोगों की भावनाएं चल रही हों, करोड़ों के सौदे पूरा हिसाब-किताब लगाकर किए जा रहे हों, वहां बाज़ार या किसी शेयर के भाव कहां जाएंगे, इसकी सटीक गिनती करना नामुमकिन है। ऐसे में शेखचिल्ली की तरह दिवास्वप्न देखना निरी मूर्खता है कि हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही होगा। कोई दूसरा आपको बताता है कि उसके पास भविष्य में झांकने का पक्का फॉर्मूला है वो आपको उल्लू बना रहा होता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी