बहुचर्चित कहावत है कि स्टॉप-लॉस लगते ही जिस ट्रेडर का दिल बैठ जाए, उसकी हालत उस सर्जन जैसी है जो ऑपरेशन टेबल पर मरीज का खून देखते ही बेहोश हो जाए। यहां सारा खेल प्रायिकता है। अच्छे से अच्छे ट्रेड के भी गलत होने की प्रायिकता 20-25% हो सकती है। घाटा ज्यादा न लगे, इसीलिए स्टॉप-लॉस की व्यवस्था की गई है। कुछ लोग तो स्टॉप-लॉस को स्टॉक ट्रेडिंग की लागत बताते हैं। अब चलाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

हर तरह के व्यापार की कुछ खास जानकारियां होती हैं। व्यापारियों के पास इन्हें पाने के अपने स्रोत, अपने ट्रेड-जर्नल होते हैं, मेटल का अलग, तेल का अलग। शेयर बाज़ार में भी प्रोफेशनल ट्रेडरों व संस्थाओं के पास अपने सॉफ्टवेयर व पेड सब्सक्रिप्शन होते हैं। बिजनेस अखबार या चैनल औरों को दिखाने को होते हैं, जानकारी के स्रोत नहीं। लेकिन हम रिटेल ट्रेडर इन्हीं को पुख्ता स्रोत मानते हैं जो गलत है। अब नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

इस महीने छुट्टियां बहुत हैं। कल से लेकर 6 अक्टूबर सोम तक बाज़ार बंद। फिर 23-24 गुरु-शुक्र को लक्ष्मी पूजन व दिवाली बलि प्रतिपदा। याद करें, छह साल पहले 24 अक्टूबर 2008 को पूरे बाज़ार का दीवाला निकल गया था। उस दिन वैश्विक वित्तीय संकट का झटका बड़ी ज़ोर से लगा और निफ्टी 13% टूटा था। क्या वैसा संकट फिर नहीं आ सकता? ऐसे संकट तक में कमाते हैं ऑप्शन ट्रेडर। अब इस सप्ताह का आखिरी ट्रेड…औरऔर भी

सहज स्वभाव जीवन के बहुतेरे क्षेत्रों में बड़े काम का हो सकता है। पर ट्रेडिंग में यह आपको कंगाल बना सकता है। कारण, ट्रेडिंग में कमाई के लिए दो चीजें ज़रूरी हैं। पहली, बाज़ार कैसे काम करता है, इसकी जानकारी। इसे हम सहज स्वभाव से नहीं जान सकते। इसके लिए परत-दर-परत हमें पैठना पड़ता है। दूसरी ज़रूरी चीज़ है अनुशासन। ट्रेडिंग के नियम बनाकर सख्ती से पालन। यह भी कतई सहज नहीं। अब पकड़ें मंगलवार की धार…औरऔर भी

ठीक उस वक्त जब हवा के रुख पर चलनेवाले बड़े-बड़े विद्वान अगले कुछ दिनों नहीं, कुछ महीनों की मंदी की भविष्यवाणी करने लगे थे, तभी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने भारत की संप्रभु रेटिंग एक पायदान उठाकर माहौल को खुशगवार बना दिया। अब एक बार फिर खरीद का सिलसिला चल निकलने की उम्मीद है। साथ ही उम्मीद है कि रिजर्व बैंक कल मंगलवार को मौद्रिक नीति समीक्षा में कुछ मंगल घोषणा कर सकता है। पर क्या होगा आज…औरऔर भी

बाज़ार में अमूमन तीन तरह की टिप्स चलती हैं। एक जो ट्रेंड की दिशा में चलाई जाती है। ऐसा सभ्य किस्म के ब्रोकरेज हाउस करते हैं। हालांकि अक्सर वे रिटेल को खरीदने तो संस्थाओं से बेचने को कहते हैं। दूसरी जो अंदरूनी खबर, एफआईआई या नामी निवेशकों की खरीद के नाम पर उड़ाई जाती है। तीसरी ऑपरेटर अपनी पकड़ वाले स्टॉक्स में चलाते हैं। इनमें सबसे खतरनाक यही तीसरी टिप्स होती है। इनसे बचें तो शुक्र मनाएं…औरऔर भी

हेड या टेल। 50-50% प्रायिकता। फिल्म शोले की तरह सिक्का सीधा खड़ा होगा, ऐसा हकीकत में अमूमन नहीं होता। शेयर बढ़ेगा या घटेगा या यथावत रहेगा। ज्यादा प्रायिकता के लिए ट्रेंड के साथ चलने का सूत्र अपनाया जाता है। लेकिन ट्रेंड तभी तक फ्रेंड है जब तक वो दिशा नहीं बदलता। दरअसल, कहां से ट्रेंड बदलेगा, उसी बिंदु को पकड़कर किए गए सौदे सबसे ज्यादा मुनाफा कराते हैं। इसे सीखना बड़ी चुनौती है। अब आज का बाज़ार…औरऔर भी

कोई भी सौदा तभी पूरा होता है जब खरीदने और बेचनेवाले, दोनों को लगता है कि वो उसके लिए फायदे का सौदा है। खरीदनेवाले को लगता है कि शेयर अभी और चढ़ेगा जिसके लिए जरूरी है कि उसके बाद भी दूसरे लोग उसे जमकर खरीदें। वहीं बेचनेवाले को लगता है कि निकल लो, अन्यथा यह और गिरेगा जिसके लिए चाहिए कि उसके बाद भी लोग उसे जमकर बेचें। समझिए यह परस्पर पूरक सच। चलाइए बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ज्यादातर रिटेल ट्रेडर इंट्रा-डे ट्रेडिंग करते हैं। इसमें सफलता के लिए ज़रूरी शर्त है कि आपके पास भरपूर पैसा, भरपूर समय और भरपूर अनुभव होना चाहिए। इनमें से रिटेल ट्रेडरों के पास एक ही चीज़ पर्याप्त होती है, वो है भरपूर समय। बाकी दो चीजों के अभाव में वो बराबर घाटा खाते रहते हैं। बहुत हुआ तो ठेले-खोंमचेवाले जैसी जिंदगी जीने लायक कमा लेते हैं। बड़ी अजीब त्रासदी है यह। चलिए, देखते हैं अब मंगलवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

व्यापारी बेचने के लिए जो माल लेता है, उससे उसे कोई निजी मोह नहीं होता। वो दुकान में वही माल लाता है जो चलता है। बेकार में दुकान की जगह भरता। इसी तरह शेयर बाज़ार के ट्रेडर को भी किसी स्टॉक से मोह नहीं पालना चाहिए। वही स्टॉक्स लें जिनमें लिक्विडिटी अच्छी हो। खरीदने और बेचनेवाले शेयरों की सूची अपडेट करते रहना चाहिए क्योंकि अपट्रेन्डिंग और डाउनट्रेन्डिंग स्टॉक बदलते रहते हैं। तो, पकड़ें अब सोम का सिरा…औरऔर भी