इंट्रा-डे नहीं, स्विंग ट्रेड में ही दमखम
दस-बारह साल पहले तक इंट्रा-डे ट्रेडरों का मंत्र था कि किसी भी शेयर को बिड प्राइस (जिस पर कोई खरीदना चाहता है) पर खरीदो और आस्क प्राइस (जिस पर कोई बेचना चाहता हो) पर बेच दो। अमूमन आस्क प्राइस बिड प्राइस से ज्यादा होता है तो ट्रेडर इस अंतर से कमा लेते थे। लेकिन जब से अल्गोरिदम आधारित हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेड होने लगे तो रिटेल ट्रेडर पिटने लगा और स्विंग ट्रेड उसका सहारा बना। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
