ट्रेडिंग में स्टॉप-लॉस का वही महत्व है जो गाड़ी में ब्रेक का। दरअसल, स्टॉप-लॉस का तत्व हर ट्रेडर के डीएनए का हिस्सा होना चाहिए। लेकिन बहुत से लोग अपने को सही ठहराने के लिए स्टॉप-लॉस को उल्टी दिशा में गिराते-उठाते रहते हैं। लॉन्ग सौदे में शेयर गिर गया तो स्टॉप-लॉस को और नीचे ले जाते हैं। शॉर्ट किया तो स्टॉक के बढ़ने पर स्टॉप-लॉस उठा दिया। इस तरह अनुशासन तोड़ना घातक होता है। अब मंगलवार का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार नशे में टुन्न किसी मनोरोगी जैसा है। यह कहना है दुनिया के सबसे कामयाब निवेशक वॉरेन बफेट का। हम उनकी बात को कतई चुनौती नहीं दे सकते क्योंकि ऐसी सोच की बदौलत ही उन्होंने करीब 7300 करोड़ डॉलर की दौलत बनाई है। लेकिन यह भी सच है कि बाज़ार उल्लास और अवसाद की अतियों के बीच झूलता है। समझदार ट्रेडर ‘नशे में टुन्न मनोरोगी’ बाज़ार के इसी बर्ताव से कमाते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बड़ी उलटबांसियां चलती हैं बाज़ार में। जैसे अगर किसी शेयर में खरीदनेवाले बिड, बेचनेवाले ऑफर से कई गुना ज्यादा हों, खबर भी जबरदस्त हो तो सामान्यतः उसका भाव चढ़ जाना चाहिए। फिर भी वह ठहरा हुआ है तो हम खरीदने के लिए लपकते हैं। लेकिन सावधान! इस स्थिति में संस्थाएं बेचने को तैयार बैठी रहती हैं और अगले कुछ दिनों में उस शेयर में भारी गिरावट आ सकती है। अब नज़र डालते हैं शुक्रवार की मनोदशा पर…औरऔर भी

कमोडिटी, फॉरेक्स या स्टॉक ट्रेडिंग मूलतः किसी अन्य व्यापार जैसी है। लेकिन इसमें कई विशिष्टताएं और स्तर हैं। बाज़ार जब ट्रेंड में चल रहा हो, तब दूसरा प्रपत्र और जब सीमित रेंज में भटक रहा हो, तब कोई दूसरा प्रपत्र। हर स्थिति में यहां कमाई का ज़रिया निकाला गया है। जैसे, बाज़ार जब सीमित दायरे में हो, तब कमाई के लिए ऑप्शन ट्रेडिंग में ‘बटरफ्लाई’ नाम की रणनीति अपनाई जाती है। अब पकड़ते हैं गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

यूरोप, अमेरिका और एशिया, खासकर जापान की भारी गिरावट ने मंगलवार की सुबह साफ संकेत दे दिया था कि भारतीय बाज़ार में भारी गिरावट आ सकती है। लेकिन सेंसेक्स 3.07% और निफ्टी 3% गिर जाएगा, इसका अंदेशा किसी को नहीं था। यह 3 सितंबर 2013 के बाद किसी एक दिन में आई सबसे तगड़ी गिरावट है। डर इतना गहरा कि निफ्टी के 50 में से 48 शेयर गिरे गए। ऐसे में क्या होनी चाहिए ट्रेडिंग की रणनीति…औरऔर भी

निवेश/ट्रेडिंग उनके लिए है जिनके पास ज़रूरत से ज्यादा धन है। जो ऐसी स्थिति में नहीं हैं, उन्हें पहले कोई कामधाम करके कमाने का इंतज़ाम करना चाहिए। लेकिन जिनके पास पूंजी है, उन्हें भी ज्यादा लाभ की जगह अपनी पूंजी की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। पर अक्सर होता यह है कि ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में हम मतिभ्रम का शिकार हो जाते हैं और अपनी आधार पूंजी गंवा बैठते हैं। अब करें मंगलवार का अभ्यास…औरऔर भी

संख्याएं कभी झूठ नहीं बोलती क्योंकि उनमें कोई भावना नहीं होती। इसी तरह भाव हमेशा सच और सच ही बोलते हैं। लेकिन उनके पीछे छिपी बाज़ार भावनाओं को पकड़ना हमारा काम है। भावों के पीछे की भावना को समझने के लिए हमें भावना-मुक्त होना पड़ता है। पर सहज इंसान होने के नाते यह काम बेहद मुश्किल है। भावनाओं से ऊपर उठने के लिए साधना करनी पड़ती है जो अभ्यास से सधती है। अब देखें सोम का व्योम…औरऔर भी

दीर्घकालिक निवेश के लिए आप ‘तथास्तु’ जैसी किसी ईमानदार सेवा पर निर्भर रह सकते हैं। हालांकि यहां भी अपनी तसल्ली के लिए कंपनी पर रिसर्च करना ज़रूरी है। लेकिन ट्रेडिंग के लिए नामी सलाहकार फर्म की भी सेवा महज एक इनपुट है। इसमें बुनियादी रिसर्च व मानसिक तैयारी आपको ही करनी पड़ती है। दुनिया में कोई भी ट्रेडर दूसरों की रिसर्च पर सफल नहीं हुआ तो आप कैसे होंगे! अब संधिकाल के इस हफ्ते का आखिरी ट्रेड…औरऔर भी

साल 2015 में ट्रेडिंग का पहला दिन; तो, कुछ बातें दिमाग में साफ-साफ बैठा लेनी चाहिए। सबसे पहले, ट्रेडिंग पूंजी को कभी इतना न उड़ने दें कि उतना वापस कमाना मुश्किल हो जाए। दूसरे, इसमें आपकी जीत पर कोई हारता और आपकी हार पर कोई जीतता है। सारा प्रायिकता का खेल है। तीसरे, यहां फायदा वही कमाता है जो आम व्यापार की तरह थोक के भाव खरीदता और रिटेल के भाव बेचता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

2014 के पहले दिन से आखिर से एक दिन पहले तक सेंसेक्स 28.86% और निफ्टी 30.89% बढ़ा है। निवेशक इस बढ़त से कमाते हैं। वहीं इसी दौरान सेंसेक्स के उतार-चढ़ाव का अंतर 44.38% और निफ्टी के उतार-चढ़ाव का अंतर 45.39% रहा है। ट्रेडर इस अंतर से कमाते हैं। इस तरह गुजरा साल निवेशकों व ट्रेडरों दोनों के लिए ही अच्छा रहा। लेकिन उन्हीं के लिए जिन्होंने धैर्य, रिस्क और बुद्धि का इस्तेमाल लिया। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी