बाज़ार बजट के खुमार में जितना चढ़ा था, उतना उतर चुका है। बजट के दो दिन पहले 26 फरवरी को निफ्टी 8683.85 पर बंद हुआ था। कल इससे थोड़ा नीचे जाने के बाद 8699.95 पर बंद हुआ। इस दौरान दस ट्रेडिंग सत्रों में निफ्टी नीचे में 8669.45 से ऊपर में 9119.20 तक गया। 449.75 अंक या 5.19% का अंतर! ऐसी लहरें बाज़ार में आती-जाती रहती हैं और कुशल ट्रेडर इसका फायदा उठाते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

जीवन का सारा ज्ञान-विज्ञान जो हो चुका है, उसकी तह में पैठने से निकलता है। इसके आधार पर आगे जो हो सकता है, उसका अनुमान लगाया जाता है। यह अनुमान सही हो सकता है और गलत भी। गलत हुआ तो नए मिले तथ्यों के आधार पर नई परिकल्पना या हाइपोथिसिस की जाती है और परीक्षणों पर उसे कसकर नया ज्ञान-विज्ञान निकाला जाता है। ट्रेडिंग को भी साधने की यही प्रक्रिया है। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार इस मामले में आम बाज़ारों से अलग है कि यहां भाव गिरने पर खरीदार भी बिकवाल बन जाते हैं और बाज़ार गिरता जाता है। वहीं, आम बाज़ार में माल का दाम गिरने पर खरीदनेवाले बढ़ जाते हैं। दरअसल वित्तीय बाज़ार में भाव आशा या निराशा के चलते बढ़ते-घटते हैं। यहां अलग किस्म की भावना काम करती है। सफल ट्रेडर भाव को भावना से मुक्त करके देखता है। कोशिश करें अब मंगलवार की नब्ज पकड़ने की…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में देश-विदेशी संस्थाओं के अलावा एनआरआई, एचएनआई और ब्रोकर हाउस भी ट्रेड करते हैं। इनकी खरीद-बिक्री से ही बाज़ार की दशा-दिशा तय होती है। लेकिन वे क्या कर रहे हैं, यह हम पहले से पता लगाने के चक्कर में पड़े तो पक्का धोखा खाएंगे। वे जो कुछ करते हैं, वह रोज़ाना भावों के चार्ट में खुलकर सामने आ जाता है। हमारा काम इन भावों से भावी दिशा को भांपना भर है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

सुबह-सुबह रिजर्व बैंक ने अचानक जब ब्याज दर 0.25% घटाकर 7.5% कर दी तो बाज़ार उछल पड़ा। सेंसेक्स 30,000 और निफ्टी 9100 के पार चला गया। लेकिन तभी मुनाफावसूली का ऐसा सिलसिला चला कि सेंसेक्स 0.72% और निफ्टी 0.82% गिरकर बंद हुआ। इससे एक ही बात साफ होती है कि खबरों और भावों में रिश्ता तो है, मगर सीधा नहीं। भाव खरीद और बिक्री के संतुलन से ही तय होते हैं। अब पकड़ते हैं गुरु की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में सफल ट्रेडिंग के लिए बाज़ार बंद होने के बाद डेढ़-दो घंटे और सुबह बाज़ार खुलने से पहले डेढ़-दो घंटे रिसर्च करना ज़रूरी है। हम ऐसी रिसर्च में खुद भी लगभग इतना-ही समय लगातार आपका काम थोड़ा आसान कर देते हैं। लेकिन ऐसा संभव नहीं कि आप कोई मेहनत न करें, बस यह कॉलम पढ़कर ट्रेडिंग से कमाई कर लें। ट्रेडिंग का अपना सिस्टम व अनुशासन आपको ही बनाना पड़ेगा। अब लगाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अगर आप किसी चीज़ को सरल रखें, तामझाम व झांकी न जोड़ें तो लोग उसे नहीं खरीदते। बेचने के लिए पैकेजिंग बड़ी जानदार होनी चाहिए। लेकिन धन बनाने का फंडा बड़ा सीधा होना चाहिए। ट्रेडिंग में यह बात पूरी तरह लागू होती है। जो लोग टेक्निकल एनालिसिस के तमाम इंडीकेटरों से लेकर फंडामेंटल व फिबोनाच्ची नंबरों का सहारा लेते हैं, वे प्रायः घाटा खाते हैं। वहीं सरलता आपको सफलता तक ले जाती है। अब मंगल की नब्ज़…औरऔर भी

बजट अच्छा है या बुरा, इस पर माथापच्ची करना विश्लेषकों व कंपनियों के रणनीतिकारों का काम है। ट्रेडर का काम तो जो और जैसा है, उसमें कमाने की जुगत निकालने का है, बजट की लहर पर सवारी गांठने का है। बजट से बाज़ार उठता है तो बढ़नेवाले शेयरों के साथ कमाना है। सीमित दायरे में रहे तो रिट्रेसमेंट या इम्पल्स से कमाएंगे। नीचे गिरे तो स्टॉक्स के सपोर्ट स्तर से कमाएंगे। अब बजट-बाद की ट्रेडिंग का आगाज़…औरऔर भी

ट्रेडिंग का आसान सूत्र है कि आप सामनेवाले से थोड़ा-सा भी बेहतर हुए तो जीतेंगे। बेहतरी तीन चीजों से बनती हैं – सूचनाएं, विश्लेषण व भावनात्मक बर्ताव। पहली दो चीजें आपको बाहर से मिल सकती हैं, जबकि तीसरी व निर्णायक चीज़ के मालिक आप हैं। आप कहेंगे कि भावना तो हर इंसान में होती है, उससे कैसे बचा जा सकता है! सही बात है। इसीलिए पोजिशन साइज़िंग व स्टॉप-लॉस का अनुशासन है। अब छलांग बजट के बवंडरऔरऔर भी

प्रभु का रेल बजट देश व भारतीय रेल की अर्थव्यवस्था के लिए कितना अच्छा है या बुरा, यह तो बाद में पता चलेगा। लेकिन इतना तो साफ है कि रेल से जुड़ी तमाम कंपनियों – टीटागढ़ वैगन्स, टेक्समैको रेल, केरनेक्स माइक्रो, कंटेंनर कॉरपोरेशन, स्टोन इंडिया व कालिंदी रेल के शेयर और ज्यादा गिर गए। इसीलिए नियम है कि कोई लाख कहे, जिन दिन खबर हो, उस दिन कतई ट्रेड नहीं करना चाहिए। अब करते हैं शुक्रवार काऔरऔर भी