ज्यादा रिटर्न का लालच किसे नहीं खींचता! लेकिन हमें याद नहीं रहता कि रिटर्न के साथ रिस्क का आनुपातिक रिश्ता होता है। रिटर्न ज्यादा तो रिस्क ज्यादा। रिस्क कम तो रिटर्न कम। इसे बावजूद हर कोई न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न कमाना चाहता है। हम इसी काम में आपकी मदद करने की कोशिश करते हैं। फिर भी हर सौदे से पहले आपको सोच लेना चाहिए कि उसमें आप कितना गंवाने को तैयार हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

हमारी औकात नहीं कि किसी शेयर का भाव उठा-गिरा सकें। हमारे 10-20 हज़ार या दो-चार लाख डालने से कोई फर्क नहीं पड़ता। दरअसल, बाजार में भाव वे दिग्गज तय करते हैं जो एक सौदे में आराम से पांच-दस करोड़ डाल देते हैं। उनका सौदा चार्ट पर बड़ी कैंडल के रूप में दिख जाता है। निश्चित बिंदु पर उनकी दिशा पकड़कर हम भी बाज़ार से कमा सकते हैं। यही मोटा-सा नियम है। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग प्रायिकता या संभावना का खेल है। कंपनी का प्रवर्तक तक डंके की चोट पर नहीं कह सकता कि उसका शेयर कहां से कहां तक जाएगा। कुछ दिन पहले किसी सज्जन का ई-मेल आया कि आपकी सलाह अगर 70% भी निशाने पर लगती है तो वे यह सेवा सब्सक्राइब कर लेंगे। मेरा विनम्र निवेदन है कि सर्वश्रेष्ठ सेवा का भी स्ट्राइक रेट 60-65% से ज्यादा नहीं होता। हमें यह सच स्वीकार करना पड़ेगा। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

पुरानी कहावत है कि बिना अपने मरे स्वर्ग नहीं मिलता। यह बात ट्रेडिंग पर भी लागू होती है। बाज़ार में भावनाओं को पढ़ने की कला आपको आनी ही चाहिए। यह भावों के चार्ट में झलकती है। ब्रोकर दें या न दें, इसे बीएसई व एनएसई अपनी साइट पर बराबर देते हैं। इसके साथ-साथ वे वोल्यूम का पैटर्न देते हैं जिन्हें आप दैनिक, साप्ताहिक या महीने के टाइमफ्रेम में देख सकते हैं। अब पकड़ते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अक्सर देशी-विदेशी ब्रोकरेज हाउस कुछ स्टॉक्स को अपग्रेड करते रहते हैं। जैसे ही ये अपग्रेड आते हैं, शेयर के भाव उछल जाते हैं। पर, फौरन ही तेज़ गिरावट का शिकार हो जाते हैं। दरअसल, यह आम निवेशकों या ट्रेडरों को छकाने की चाल है ताकि शेयर बढ़ जाए और ब्रोकरेज हाउस या उनके बड़े क्लाएंट मुनाफावसूली कर सकें। विशेषज्ञों का भी यही हाल है क्योंकि उनका स्वार्थ हमारे स्वार्थ से मेल नहीं खाता। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

हमारे-आप जैसे बहुत सारे लोग फ्यूचर्स व ऑप्शंस में ट्रेड करते हैं, वो भी निफ्टी के फ्यूचर्स/ऑप्शंस में और लालच में फंसकर अक्सर पिटते हैं। वैसे, एफ एंड ओ की सूची से हम ट्रेडिंग करनेवाले शेयरों का चुनाव कर सकते हैं। एनएसई में रोजाना लगभग 1500 कंपनियों में ट्रेडिंग होती है, जबकि एफ एंड ओ की लिस्ट में करीब 145 कंपनियां हैं। इनमें से 10-15 को हम कैश ट्रेडिंग के छांट सकते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

यांत्रिक लीवर कम ताकत लगाकर ज्यादा भार उठाता है। इसी से निकला है लीवरेज़, वित्तीय बाज़ार में जिसका मतलब होता है कम धन या मार्जिन लगाकर ज्यादा कमाने का मौका। यह डेरिवेटिव्स, खासकर फ्यूचर्स में चलता है। मान लें, किसी स्टॉक में 5% मार्जिन है और वो 1% बढ़ता है तो आपका असल फायदा 20% होता है। पर गिरने पर घाटा भी इतना तगड़ा होता है। भरपूर रिस्क तो भरपूर फायदा। आइए अब चलाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

एक आम ट्रेडर होने के नाते न तो आपके पास बड़े-बड़े स्क्रीन हैं, न ही बहुत तेज़ कनेक्शन या उन्नत चार्टिंग सॉफ्टवेयर जो पलक झपकते सारी तस्वीर साफ कर दे। पूंजी भी ज्यादा नहीं। इसके बावजूद सामनेवाले पर बीस पड़ना है तभी ट्रेडिंग से कमा सकते हैं। इसके लिए एक अंतर्दृष्टि बनाने की ज़रूरत है जिसे हासिल आपको ही करना है। हम इसमें बस आपका सहयोग करते और अभ्यास कराते हैं। अब परखते हैं मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

सच्चा दोस्त वह है जो आपको संकट में डूबने नहीं देता। लेकिन धंधे में सगा भाई तक सगा नहीं होता! फिर, ब्रोकर, कंपनी या सलाहकार लाख ‘कस्टमर फर्स्ट’ का दावा करें, दरअसल उनका अपना फायदा ही सर्वोपरि होता है। इसलिए धंधे में आपको खुद ही अपना सच्चा दोस्त चुनना होता है। ट्रेडिंग में ऐसा ही सच्चा दोस्त है स्टॉप-लॉस जो आपको बचाता है और घाटे की दलदल में धंसने नहीं देता। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अमिताभ बच्चन से लेकर सचिन तेंदुलकर तक को भगवान माननेवालों की कमी नहीं। पर हकीकत यही है कि किसी को भी भगवान मानने से अपना भला नहीं होता, भले ही उनकी मार्केटिंग वालों का भला हो जाए। इसी तरह ट्रेडिंग में भावों को भगवान माना जाता है। मगर, वास्तव में भाव कंपनी का सच नहीं, ट्रेडरों की भावनाओं का सच दिखाते हैं। इसीलिए हताशा और उन्माद के पेन्डुलम पर झूलते हैं। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी