वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग दरअसल एक जंग है जिसमें हम विरोधी का धन निकालकर अपने खाते में खींच लेते हैं। इसलिए यह भलीभांति समझना ज़रूरी है कि हमारे सामने कौन है। यह जानना भी ज़रूरी है कि बाज़ार में असली असर देशी-विदेशी संस्थाओं की हरकतों का पड़ता है। रिटेल ट्रेडर कभी भी बाज़ार की दशादिशा तय नहीं करते। लेकिन हम तो अक्सर अंधेरे में तीर चलाते हैं। लगा तो तीर नहीं तो तुक्का! अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर या किसी भी वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग के पीछे मूल सोच होनी चाहिए न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न कमाने की जुगत निकालना। इसीलिए आम ट्रेडरों के लिए सिद्धांत यह है कि जिस दिन भी कोई खबर बड़ी आनेवाली हो, डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी का दिन हो, कंपनी के नतीजे आने हों, उस दिन ट्रेडिंग कतई ना करें। कारण, इन दिनों खबरों के अंधड़ में भावों में बड़ी उठापटक होती है। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

इंजीनियरिंग या मेडिकल जैसी किसी भी प्रोफेशनल पढ़ाई में चार-पांच साल लगते हैं। लेकिन वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग को हम लोग दाएं-बाएं हाथ का खेल समझते हैं, जबकि यह एक साथ साइंस और आर्ट दोनों ही है। इसमें इसके विज्ञान को समझने के साथ ही कला में भी महारत हासिल करनी पड़ती है जिसके लिए काफी अभ्यास की ज़रूरत पड़ती है। फिर, हमें अपने मन व भावनाओं को भी ट्रेन करना पड़ता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

ट्रेडर का ध्यान किसी और बात के बजाय हमेशा इस पर रहना चाहिए कि वो अपनी पूंजी पर कितना रिटर्न कमा पा रहा है। आपके कितने सौदे सही बैठे और कितने गलत, यह महत्वपूर्ण नहीं। महत्वपूर्ण यह है कि जो सौदे सही बैठे, उनमें आपने कितना कमाया और जो गलत बैठे, उनमें कितना गंवाया। यह मेरा नहीं, बल्कि अब तक के सबसे बड़े ट्रेडर जॉर्ज सोरोस का नीति-वाक्य है। हमेशा इसे याद रखें। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग में धन प्रबंधन का एक तरीका पोजिशन साइज़िंग और दूसरा तरीका स्टॉप-लॉस है। स्टॉप-लॉस का स्तर हर शेयर के स्वभाव के हिसाब से तय होता है। वैसे, अगर आप ब्रोकरों या तथाकथित एनालिस्टों की सलाह पर गौर करें तो उनका स्टॉप-लॉस 5-10% तक के नुकसान का होता है। यह उनके फंसाने की चाल है। हमें रिस्क व रिवॉर्ड के आधार पर एक सौदे में 2% से ज्यादा नुकसान कतई नहीं उठाना चाहिए। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग पद्धति या सिस्टम के अनुशासन के बावजूद बाज़ार का रिस्क समाप्त नहीं होता। बाज़ार की असली चाल कभी भी हमारी गणना को मात दे सकती है। यह जोखिम संभालने के लिए पोजिशन साइजिंग और स्टॉप-लॉस का सहारा लिया जाता है ताकि हमारी ट्रेडिंग पूंजी को आंच न आए। पोजिशन साइजिंग में हम किसी एक सौदे में अपनी 2-5% से ज्यादा पूंजी नहीं डालते ताकि सौदा टूटे भी तो 95% पूंजी सलामत रहे। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

टेक्निकल एनालिसिस पुराने भावों के आधार पर नए भावों का अंदाज़ लगाने का माध्यम है। इसके अलग-अलग संकेतकों को मिलाकर बहुत सारी पद्धतियां लोग अपनाते हैं। इनके ही अनुशासन में बंधने पर कोई ट्रेडर मुनाफा कमा पाता है। पर, बड़ी खबर आ जाए तो ऐसी किसी भी पद्धति के परखच्चे उड़ जाते हैं। दुनिया के एक कोने में तितली तक का पंख फड़फड़ाना कहीं और तूफान के आने का सबब बन जाता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

पिछली बार हमने बात की थी ट्रेडिंग करते वक्त पद्धति और धन-प्रबंधन की। यहां पद्धति का मतलब यह है कि आप टेक्निकल एनालिसिस के किन इंडीकेटरों को मिलाकर सौदा करने का फैसला करते हैं। जैसे, एक पद्धति यह है कि जब कम समय के ईएमए की लाइन उससे ज्यादा समय के ईएमए को काटती ऊपर जा रही हो और एमएसीडी धनात्मक हो तो उस स्टॉक में लॉन्ग सौदा कर सकते हैं। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

ट्रेडिंग किन्हीं मायनों में बड़ी गूढ़ पहेली है और बहुत आसान भी। गूढ़ इसलिए कि जो इसके उस्ताद हैं, वो अपना हुनर किसी को बताते नहीं और जो नहीं जानते वो चैनलों से लेकर तमाम मीडिया में बकबक करते रहते हैं। आसान इसलिए कि ट्रेडिंग में सफलता के दो ही तरीके हैं। एक, आपके पास कोई न कोई पद्धति होनी चाहिए और दो, आपका धन-प्रबंधन चौकस होना चाहिए। इस पर कभी विस्तार से। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

क्या शेयर या किसी भी वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग सट्टा लगाने जैसा नहीं है? जब आप आंख मूंदकर मन के कहे मुताबिक दांव लगाते हैं तो यकीनन यह लॉटरी, जुआ या सट्टेबाज़ी से अलग नहीं। लेकिन, जब आप अवसरों की नापजोख के बाद ट्रेडिंग करते हो तो यह कतई सट्टेबाज़ी नहीं है। ट्रेडिंग में आप किस्मत से नहीं खेलते, बल्कि रिस्क लेते हो, जोखिम उठाते हो जिसका नफा-नुकसान आप पाते हो। अब पकड़ते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी