असली सवाल यह कि बाज़ार में बड़ों की चाल को पकड़े कैसे? जो लोग कानाफूंसी करते हैं कि एफआईआई, एलआईसी या कोई तोप-तमंचा फलानां स्टॉक खरीद रहा है तो या तो वे झूठ बोलते हैं या कुछ ऑपरेटरों के गुर्गे होते हैं। बड़ों की चाल हम चार्ट पर बखूबी पकड़ सकते हैं। वे तभी निवेश करते हैं जब कोई शेयर दिशा बदलनेवाला होता है, गिरकर उठने या उठकर गिरने जा रहा होता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

हम बराबर देखते हैं कि बाज़ार की अंतिम चाल देशी-विदेशी संस्थाएं तय करती हैं। वहीं, छोटे व मध्यम दर्जे के स्टॉक्स ऑपरेटर या झुनझुनवाला टाइप उस्ताद लोग उठाते-गिराते हैं। दशकों से हम देख रहे हैं कि बाज़ार को कभी हर्षद मेहता तो कभी केतन पारेख जैसे लोग उंगलियों पर नचाते रहे हैं। बाज़ार हमेशा बड़ों के इशारे पर चलता है। फिर भी हम गफलत में रहते हैं कि बाज़ार हमारे हिसाब से चलेगा। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार अगर इंसान होता तो निरा पागल होता। इसके साथ कुछ असाध्य मानसिक समस्याएं हैं। कभी भयंकर उछलकूद मचाता है और शेयरों के भाव सातवें आसमान पर पहुंच जाते हैं तो कभी निराशा में ऐसा डूबता है कि लाख कोशिशों के बावजूद उठने का नाम नहीं देता। सरकार भी उसके आगे थक जाती है। वित्तीय बाज़ार हम जैसे लोगों से ही बनता है, लेकिन उसका सामूहिक व्यक्तित्व तर्कों से परे चला जाता है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

सप्ताह के आखिरी दिन, ट्रेडिंग का सबसे पहला बुनियादी नियम। ट्रेडिंग जितनी और जैसी करें, लेकिन अपनी ट्रेडिंग पूंजी को कतई आंच न आने दें। वो सलामत रहेगी तभी आपकी ट्रेडिंग चल पाएगी। और, उसे सलामत रखना एकदम आपके हाथ में है। किसी एक सौदे में 2% और पूरे महीने में 6% से ज्यादा नुकसान कभी न होने दें। इस सीमा तक पहुंचते ही उस महीने की ट्रेडिंग फौरन रोक दें। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग के सदमे से बचने का एक आजमाया हुआ तरीका यह है कि जैसे ही आप बाज़ार से मुनाफा कमाना शुरू कर दें, धीरे-धीरे अपना शुरुआती निवेश निकालकर किनारे रख दें। आगे की ट्रेडिंग बचे हुए मुनाफे से ही करें। इससे एक तो यह होगा कि आपकी बचत सुरक्षित रहेगी। दूसरा फायदा यह होगा कि घाटा लगने पर भी आप को मानसिक झटका नहीं लगेगा और आप बिना घबराए संतुलित फैसला ले पाएंगे। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग के खतरे या रिस्क को न्यूनतम करने का दूसरा तरीका यह है कि कभी अपना पूरा ट्रेडिंग पोर्टफोलियो एक ट्रेड में न लगाएं। आम मानसिकता फटाफट मुनाफा बटोरने की होती है। लेकिन ध्यान रखें हड़बड़ी शैतान का काम है। अपना निवेश बराबर-बराबर महीने में 20 दिन के ट्रेड में बांट दें। इसे पोजिशन साइज़िंग भी कहते हैं। इससे आप ट्रेडिंग के रिस्क को कम और रिटर्न को अधिकतम कर सकते हैं। अब आजमाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

नौसिखिया निवेशक के लिए कमोडिटी या शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग बड़ी खतरनाक है। लेकिन इस खतरे से बचने के कुछ समयसिद्ध नियम हैं। एक नियम तो यह है कि आनेवाले कुछ सालों के अपने नियमित खर्चों को पूरा करने और सुरक्षित निवेश के लिए जो धन एकदम नहीं चाहिए होगा, उसे ही ट्रेडिंग में लगाना चाहिए। आदर्श स्थिति यह है कि आपका जितना निवेश है, उसका 5% ही ट्रेडिंग में लगाए। अब परखते हैं मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

चार्ट दरअसल बाज़ार में सक्रिय खरीदारों व विक्रेताओं और उनके बीच बनते-बिगड़ते नए-पुराने संतुलन का आईना है। लेकिन अक्सर हम वहां वो नहीं देखते जो चार्ट दिखाता है, बल्कि वो देखते हैं जो हम देखना चाहते हैं। इसलिए चार्ट बाज़ार का नहीं, हमारे मन का आईना बन जाता है। जाहिर है कि बाज़ार हमारे नहीं, लाखों लोगों के मन व गणनाओं से चलता है तो हमारे हारने की प्रायिकता 99% हो जाती है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

कमोडिटी व शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग सिखाने के बहुत सारे क्लासेज़ हैं। 20-25,000 से लेकर दो-ढाई लाख रुपए तक लेते हैं। क्या आपको लगता है कि एक बार इतने खर्च कर दिए तो ट्रेडिंग के उस्ताद बन जाएंगे? अगर हां तो आप एकदम गलत सोचते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात है मूल सूत्रों को समझकर निरंतर अभ्यास करना। अभ्यास में तो इतना दम है कि एकलव्य अर्जुन से भी महान धनुर्धर बन जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

पैसे गंवाने में कोई मेहनत नहीं लगती, बनाने में लगती है। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग तो कुछ ज्यादा ही कठिन है। कारण, इसके लिए हमें अपना पूरा माइंटसेट बदलना पड़ता है जो अपने-आप में बेहद मुश्किल काम है। घाटे से हर कोई भागता है। लेकिन ट्रेडिंग करनी है तो दिमाग में बैठाना पड़ेगा कि यहां घाटे से कोई नहीं बच सकता। घाटा इस बिजनेस की लागत है जिसे न्यूनतम रखना सीखना पड़ता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी