मूल स्टॉक का भाव 1% घटा-बढ़ा तो उसके कॉल-पुट ऑप्शन का भाव 15-20% ऊपर-नीचे हो जाता है। फिर इन ऑप्शन सौदों में धन भी कम लगता है। मसलन, इनफोसिस के 1240 के कॉल का भाव 3 रुपए है। 250 का एक लॉट खरीदा तो मात्र 750 रुपए लगेंगे, जबकि 1150 का पुट 9.45 रुपए का है तो एक लॉट 2362.50 का हुआ। ऊपर से लोग कॉल-पुट साथ खरीदते हैं। मगर, बराबर पिटते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

फ्यूचर व ऑप्शन सौदे मूल कमोडिटी या स्टॉक से ही डेराइव होते हैं, इसीलिए उन्हें डेरिवेटिव्स कहा जाता है। लेकिन उनके भावों के निर्धारण में सीधे-सीधे मांग या आपूर्ति नहीं, बल्कि ब्याज दर जैसे कई कारकों का रोल होता है। जैसे सामान्य अंकगणित का जानकार अमूर्त बीजगणित से पार नहीं पा सकता, वैसे ही कैश बाज़ार का आम ट्रेडर एफ एंड ओ में तीर नहीं मार सकता। पहले यहां तो पारंगत हो जाओ। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

सेबी ने नए नियम के मुताबिक डेरिवेटिव सौदों का आकार पांच से दस लाख रुपए तक होगा। स्टॉक डेरिवेटिव्स का न्यूनतम लॉट 50 और इंडेक्स डेरिवेटिव्स का न्यूनतम लॉट 10 का होगा। ध्यान दें कि 5% मार्जिन पर भी न्यूनतम 25,000 रुपए दांव पर लगाने होंगे। क्या कोई रिटेल ट्रेडर इतनी ज्यादा पूंजी एक सौदे में झोंक सकता है? क्यों नहीं! शेयर 1% बढ़ा तो 20% फायदा! यही लालच उसे निगल जाता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बच्चा चांद के खिलौने की जिद करता है, जबकि बड़ा होने पर जानता है कि चांद को ज़मीन पर लाना मुमकिन नहीं; उस तक पहुंचने के लिए विशेष यान बनाने पड़ेंगे। ऐसा ही बचकानापना आम रिटेल ट्रेडर डेरिवेटिव सौदों की जिद ठानकर करते हैं। वो ऐसा न कर पाएं, इसलिए पूंजी बाज़ार नियामक, सेबी ने नवंबर माह से डेरिवेटिव सौदे का न्यूनतम आकार दो से बढ़ाकर पांच लाख रुपए का कर दिया है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

हम अनुचित लालच करते हैं, तभी फाइनेंस के धंधेबाज़ों का शिकार बनते हैं। वहीं, हम संतुलित व व्यावहारिक नज़रिया रखें तो उनकी दाल नहीं गलती। जैसे, शेयर या कमोडिटी बाज़ार की ट्रेडिंग में 65% स्ट्राइक रेट और महीने का 5% रिटर्न पर्याप्त होता है। महीने का 5% रिटर्न साल का 60% बन जाता है। एफआईआई तक 18% रिटर्न पर जश्न मनाते हैं। ट्रेडिंग की कला, कल को पकड़ने में है। उसे विकसित करें। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

टिप्स बेचनेवालों का धंधा बड़ा सेट है। जहां-तहां से फोन जुटाकर आपको फोन करेंगे। बड़ी-बड़ी बातें करेंगे। कुछ दिन का फ्री-ट्रायल देंगे। पूछिए कि क्या सेबी में आपका रजिस्ट्रेशन है तो साफ झूठ बोल देंगे या गोलमोल बातें करेंगे। साइट अंग्रेज़ी में और सेवा बेचते हैं हिंदी में। फाइनेंस के अनपढ़ लोगों को लमतड़ानी के काम पर लगा रखा है। आप इनके झांसे में न आएं तो इनकी दुकानें खुद बंद हो जाएंगी। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

तथाकथित इंदौरी ग्लोबल के कुछ लोगों ने मुझे भी हाल में टिप्स बेचने की कोशिश की। दावा किया, हर सेवा में हमारा स्ट्राइक रेट 85% से ऊपर है। महीने में न्यूनतम 30% रिटर्न दिलाने की गारंटी। मैंने कहा कि इतना रिटर्न तो दुनिया के सबसे निवेशक वॉरेन बफेट और जॉर्ज सोरोस तक नहीं कमा पाते तो आप कहां से दोगे। बोले, हमारी सेवा लेकर तो देखो। मित्रों, इनके झांसे में कतई मत आना। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

सेबी ने करीब दो महीने पहले बैंगलोर की टिप्स बेचनेवाली फर्म एचबीजे कैपिटल पर बैन लगा दिया। ऐसी तमाम फर्में इंदौर से धड़ल्ले से चल रही हैं जिनके भी शटर देर-सबेर डाउन हो सकते हैं। इन्हीं में से एक फर्म खुद को शीर्षतम ग्लोबल बताती है। शेयर बाज़ार में कैश, ऑफ्शन व फ्यूचर्स तक की टिप्स बेचती है; कमोडिटी में भी उल्लू बनाती है; महीने की सबसे सस्ती सेवा 5000 रुपए की है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

अगर आप ट्रेडिंग के लाभप्रद मौकों की तलाश में हैं तो यहीं तक सीमित नहीं रह सकते कि चार्ट सारे भेद खोल देता है। आपको अपनी पसंदीदा कंपनियों के नतीजों पर भी नज़र रखनी चाहिए। ऐसे मौके सालाना चार बार हर तिमाही में आते हैं। अक्सर मजबूत कंपनियों के शेयर अच्छे नतीजों के बावजूद गिर जाते हैं। उनका दोबारा बढ़ना तय है जिसका सिलसिला कुछ दिन की मुनाफावसूली के बाद शुरू होता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

हफ्ते की पांचवीं व आखिरी बात। बड़ों की चाल-ढाल समझने के बाद हमें जिस स्टॉक में ट्रेड करना हो, उसकी चाल-ढाल, प्रकृति को समझना होता है। कुछ शेयर निवेश के लिए अच्छे होते हैं, ट्रेडिंग के लिए नहीं। कुछ बहुत तेज़ी से उठते-गिरते हैं। कुछ महीनों तक घूम-फिरकर वैताल की तरह उसी डाल पर आ जाते हैं। कुछ नतीजे आने पर उछलते हैं। कुछ अच्छे नतीजों के बावजूद लुढ़क जाते हैं। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी