टिप्स लेकर कमाने की सोचनेवाले ट्रेडरों की फितरत एक जैसी होती है। बिजनेस चैनलों व अखबारों से धोखा खाने के बाद वे टिप्स के धंधेबाज़ों के शरणागत हो जाते हैं। वहां से गाहे-बगाहे कमा लिया तो अपनी पीठ थपथपाते हुए दूसरों को टिप्स बांटने लग जाते हैं। लेकिन जैसे ही गच्चे पर गच्चा खाते हैं तो बाज़ार से लेकर टिप्स के धंधेबाज़ों तक को गरियाने लगते हैं। टिप्स नहीं, यहां सिस्टम ज़रूरी है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाना कतई आसान नहीं। जहां देश-विदेश के धुरंधर डटे हों, जिनके पास लाखों नहीं, करोड़ों की पूंजी हों, जहां आईआईएम ही नहीं, हार्वर्ड, कोलम्बिया व लंदन तक के एमबीए रिसर्च करते हों, वहां कोई अनाड़ी सोचे कि 25,000 रुपए सालाना की ट्रेडिंग टिप्स लेकर कमा लेगा तो उसे बाद में रोना ही पड़ेगा। टिप्स देनेवाले उसकी लालच को भुना लेते हैं और वो सारी पूंजी गंवा बैठता है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

तूफान आने पर सभी भागते हैं। यह बड़ी सहज सामान्य सोच है। लेकिन जो तूफान आने से पहले सुरक्षित ठौर पकड़ लेते हैं, वही जीतते हैं क्योंकि उनकी सोच उन्नत है। अतीत से वर्तमान को परखकर जो भविष्य की आहट सुन लेते हैं, वही बाज़ार से कमाते हैं। हमेशा याद रखें कि शेयर बाज़ार में हर गिरा हुआ स्टॉक सस्ता नहीं होता, न ही हर चढ़ा हुआ स्टॉक महंगा होता है। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

औरों पर बीस पड़ने के लिए आपके पास ऐसी अंतर्दृष्टि होनी चाहिए जो सब के पास नहीं है। जटिल हालात में आपकी प्रतिक्रिया अलग होनी चाहिए। अति-उत्साह या अफरातफरी की हालत में आपका बर्ताव औरों से एकदम भिन्न होना चाहिए। सच है कि सफलता के लिए आपका सही होना ज़रूरी है। पर, सही होना ही अपने आप में पर्याप्त नहीं। आपको बाज़ार से कमाने के लिए दूसरों से ज्यादा सही होना पड़ेगा। अब चलाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग में उतरे हैं तो जाहिरा तौर पर मकसद औसत नहीं, बल्कि उससे ज्यादा रिटर्न कमाना होगा। इसके लिए आपको औसत से बेहतर ट्रेडर होना पड़ेगा, जिसके लिए आपकी सोच उन सभी से बेहतर होनी चाहिए। आज तो हर ट्रेडर के पास कंप्यूटर है, इंटरनेट से मिल सकनेवाली सारी सूचनाएं हैं। बहुतों के पास संभव है कि आपसे बेहतर सॉफ्टवेयर हो। फिर कौन-सी चीज़ है जिसमें आप उन पर भारी पड़ सकते हैं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है और यह कोई नई बात नहीं क्योंकि लालच व डर की दो अतियों के बीच झूलना उसका मूल स्वभाव है। लेकिन इसके साथ ही हर ट्रेडर के अंदर अलग किस्म का भावनात्मक संघर्ष चलता रहता है। अगर वो उसमें विजय नहीं हासिल कर पाता तो तुक्का भले लग जाए, लेकिन बराबर सफल नहीं हो सकता। इसलिए बाज़ार में जीतने से पहले उसे खुद को जीतना पड़ता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयरों के भाव का चार्ट बीएसई या एनएसई की साइट पर मुफ्त उपलब्ध हैं। दैनिक भावों के चार्ट पर आखिरी बिंदु से पीछे वहां तक जाएं, जहां से भाव ठीक पिछली बार उठने लगे थे। वहां आखिरी कैंडल का दायरा देखें। उससे संस्थाओं की मांग का ज़ोन पता लगेगा। इसी तरह ठीक जहां से भाव गिरे थे, वहां की कैंडल उनकी बिकवाली का ज़ोन बताती है। इस मोटे सूत्र में बहुतेरी बारीकियां हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के पैटर्न को पकड़ने से साफ हो जाता है कि भावों का कौन-सा दायरा है जहां वे खरीद सकते हैं या किन भावों पर वे बिकवाली कर सकते हैं। वे कभी घबराहट में सौदे नहीं करते। एक तरह की लयताल उनकी खरीद-फरोख्त में रहती है। वे जहां प्रवेश/निकास करते हैं, वहां से भाव दिशा बदलते हैं तो उनकी दिशा पकड़ने से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। अब चलाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

निवेशक तो कंपनी के बिजनेस व संभावनाओं के आकलन से लंबे सौदे पकड़ सकते हैं मगर ट्रेडरों को टेक्निकल एनालिसिस का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन जो हो चुका है, उससे आगे जो होगा, इसका सटीक अनुमान कैसे लगाया जा सकता है? यह मुश्किल तब आसान होने लगती है जब हम बाज़ार में सक्रिय बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के पैटर्न को समझना सीख जाते हैं। चार्ट पर देखें तो यह दिखने लगता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

ओस चाटने से प्यास नहीं बुझती। इसी तरह शायद इंट्रा-डे ट्रेडरों की बरक्कत नहीं होती। बेचारे सुबह से शाम तक मेहनत करते हैं। लेकिन बमुश्किल इतनी दिहाड़ी कमा पाते हैं कि किसी तरह चाय-पानी और आने-जाने का खर्चा निकल जाए। शेयर बाज़ार में कमाते हैं वही जो कई दिनों, महीनों या सालों के सौदे करते हैं। इसमें भी वे जो भावी आकलन में ज्यादा माहिर होते हैं। इस महारत का क्या है सूत्र? फिलहाल सोमवार का व्योम…औरऔर भी