वित्तीय बाजार में ट्रेडिंग की त्रिपक्षीय चुनौती का मुकाबला करना कठिन है। पर मुश्किल नहीं। इसे आत्म अनुशासन के सात कदमों से हम नाप सकते हैं। पहला कदम। आप साफ समझ लें कि ट्रेडिंग करने के पीछे आपका सामाजिक या पारिवारिक मकसद क्या है। अगर केवल अपने लिए ट्रेडिंग करना चाहते हैं, तब मामला संगीन है क्योंकि ऐसी सूरत में आप कभी भी ट्रेडिंग के लिए ट्रेडिंग करने के लती बन सकते हैं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

गिरते हैं शह-सवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेगा जो घुटनों के बल चले। जीवन में वही सफल होते हैं जो चुनौतियां लेते हैं। जिन बूड़ा तिन पाइयां गहरे पानी पैठि। मैं बपुरा बूड़न डरा, रहा किनारे बैठि। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक साथ हमें तीन मोर्चों पर चुनौती देती है। आर्थिक के साथ-साथ मानसिक व भावनात्मक स्तर पर। इसलिए इसे अपनाते वक्त बेहद सावधानी, लगन व मेहनत ज़रूरी है। अब परखते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी

ट्रेडिंग में सफलता पानी है तो अपने फैसलों की नियमित समीक्षा करनी पड़ेगी। खासकर उन सौदों की जिनमें तगड़ी चोट लगी है। स्टॉप लॉस को चोट मानना मूलतः गलत सोच है। वह तो वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग करने के बिजनेस की लागत है जिससे बचना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं। बाकी सौदों में देखना पड़ेगा कि आपने अनुशासन व ट्रेडिंग सिस्टम को कहां तोड़ा है। सिस्टम बनाए बिना ट्रेड करना आत्मघाती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

बाहरी परिस्थितियों पर हमारा वश नहीं। लेकिन उन पर हमारी प्रतिक्रिया हमारे वश में है। बाढ़ सबको बहा ले जाती है। मगर कुशल तैराक उससे बच निकलते हैं। बांध टूट जाए तो पानी गांव के गांव तबाह कर देता है। लेकिन उसी पानी से बिजली भी बनाई जाती है। जो हालात का माकूल इस्तेमाल करते हैं, वे ही आखिरकार जीतते हैं। जीवन का यह सामान्य नियम वित्तीय ट्रेडिंग पर भी लागू होता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अगर ट्रेडिंग या जीवन के किसी भी क्षेत्र में आप अपने फैसलों व काम के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं तो यह एक तरह का पलायनवाद है। नियम-अनुशासन तोड़ने और खुद निर्धारित फ्रेमवर्क का पालन नहीं करने पर कामयाबी आपके हाथ से बाहर निकल जाएगी। ट्रेडिंग में यही चीजें तो आपको औरों से भिन्न करती और जीत दिलाती हैं। बाकी तो प्रायिकता का खेल है जो सबके लिए एकसमान काम करता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

सर्वमान्य सच है कि हम शेयर बाज़ार में जो भी सौदे करते हैं, उसके लिए आखिरकार खुद ही ज़िम्मेदार होते हैं। लेकिन यहां तो हर कोई सफलता का श्रेय खुद लेता है, जबकि नाकामी के लिए अपने अलावा हर किसी को दोषी ठहरा देता है। इंटरनेट सुस्त था, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म सही नहीं था, बीवी-बच्चों या कुत्ते ने परेशान कर रखा था, सलाह देनेवाला गलत निकला। दरअसल, लोगबाग गलत साबित होने से डरते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार को सामान्य बाज़ार की तरह मांग और सप्लाई पर चलनेवाला बाज़ार मान लें तो हमारी समस्या काफी सुलझ जाती है। लेकिन शेयर बाज़ार में मांग और सप्लाई को सही तरीके से कैसे पकड़ा जाए? जवाब है कि रोज़ाना या साप्ताहिक भावों के चार्ट पर उंगली सबसे ताज़ा भाव पर रखें और पीछे वहां तक ले जाएं, जहां से भाव गिरे या उठे थे। उठे थे मांग और गिरे थे सप्लाई पर। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

सामान्य बाज़ार में लोगबाग खरीदने के लिए दाम गिरने का इंतज़ार करते हैं, जबकि वित्तीय बाज़ार में खरीदने से पहले अच्छी खबरों और भावों के चढ़ने का इंतज़ार करते हैं। हां, सिद्धांत में बराबर दोहराते हैं कि वित्तीय बाजार से कमाई के लिए निचले स्तर पर खरीदना और ऊंचे स्तर बेचना चाहिए। वित्तीय सलाहकार और विश्लेषक भी यही भाषण पिलाते हैं। अहम सवाल है कि इस सिद्धांत को व्यवहार में कैसे उतारा जाए। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

विचित्र विरोधाभास है कि सामान्य बाज़ार में लोगों का रुख वित्तीय बाज़ार से एकदम उलट रहता है। वे ज्यादातर चीजें सेल या डिस्काउंट पर खरीदना पसंद करते हैं, जबकि वित्तीय बाज़ार में चढ़ते शेयरों को खरीदना और गिरते शेयरों को बेचना चाहते हैं। यह शेयर बाज़ार को हौवा समझने से उपजी हीनता ग्रंथि का नतीजा है। सच यह है कि शेयर बाज़ार सामान्य बाज़ार की ही तरह डिमांड-सप्लाई के नियम पर चलता है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

इधर पिछले कुछ महीनों से शेयर बाज़ार में सक्रिय निवेशकों व ट्रेडरों की संख्या बढ़ती जा रही है। दरअसल जब भी बाज़ार बढ़ता है, शेयरों के भाव नई ऊंचाई बनाते हैं, तब ज्यादातर लोगों को शेयर खरीदने में बड़ी सुरक्षा महसूस होती है। वहीं, भावों के गिरने पर वे किसी भी कीमत पर बेचकर निकल लेने की फिराक में रहते हैं। यह मानसिकता दीर्घकालिक निवेश व अल्पकालिक ट्रेडिंग, दोनों के लिए घातक है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी