हर सौदा सही नहीं बैठेगा। उनमें आपको घाटा उठाना पड़ेगा। लेकिन यह स्वाभाविक है और इसमें कहीं कोई गड़बड़ नहीं। याद रखें कि जीतने और हारनेवाले सौदों का अनुपात ट्रेडिंग में सबसे कम महत्व रखता है। सबसे अहम है आपके औसत लाभ और औसत नुकसान का अनुपात। इसे समझ पाना अधिकांश लोगों के लिए बहुत मुश्किल होता है क्योंकि अमूमन लोगों की इच्छा हर वक्त, हर सौदे में सही रहने की होती है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

सामने बेचनेवाला या खरीदनेवाला कौन है और क्या वह भावना में बहकर सौदे कर रहा है या तर्क के चलते? यह सवाल आपको वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग का कोई सौदा करने से पहले खुद से ज़रूर पूछना चाहिए। यह हकीकत कभी नज़रअंदाज़ न करें कि बाज़ार में भावना से काम करनेवाले हमेशा तर्क से काम करनेवालों के लिए स्थाई कमाई का ज़रिया बने रहते हैं। तय करें कि आपको कैसे काम करना है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार का निवेश ज़ीरोसम गेम नहीं है। उसमें विक्रेता और खरीदार, दोनों का फायदा संभव है क्योंकि बीच में समय आकर निवेश का मूल्य बढ़ा सकता है। लेकिन शेयरों या वित्तीय बाज़ार की किसी भी ट्रेडिंग में बेचनेवाले का नुकसान खरीदनेवाले का फायदा या इसका उल्टा होता है। फिर भी घाटा खाने से कोई सबक नहीं सीखता और बाज़ार सदियों से चलता ही जा रहा है। इसकी मनोवैज्ञानिक वजह क्या है आखिर? अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार अगर सही तरीके से काम करे तो यह अद्भुत व्यवस्था है। यहां बेचनेवाले का फायदा होता है और खरीदनेवाले का भी। विक्रेता को माल या सेवा के बदले नोट मिलते हैं, जबकि खरीदार को नोट के बदले मूल्य मिल जाता है। उसने खर्च किए गए नोटों से कहीं ज्यादा उपयोगिता और काम की चीज़ मिल जाती है। लेकिन क्या यही नियम शेयर बाज़ार पर भी लागू होता है? अब नए संवत के पहले सोमवार का व्योम…औरऔर भी

ट्रेडिंग में सफलता के लिए ज़रूरी आत्म अनुशासन का 7वां व आखिरी कदम है अभ्यास। कोई भी हुनर किताबों से नहीं, बल्कि अभ्यास से सीखा जाता है। द्रोणाचार्य नहीं मिले, लेकिन एकलव्य अभ्यास के दम पर अर्जुन से भी बड़ा धनुर्धर बन गया। हर किसी को अपना खाना खुद पचाना होता है, उसी तरह ज्ञान को व्यवहार में खुद उतारना पड़ता है। शुरुआत में थोड़ी पूंजी, थोड़ा रिस्क। ट्रेडिंग पूंजी को बचाकर चलें। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग में सॉफ्टवेयर कौन-सा इस्तेमाल करना है? आपका ब्रोकर चार्टिंग का जो सॉफ्टवेयर देता है, क्या वह पर्याप्त है या आपका काम बीएसई व एनएसई की साइट पर मिल रहे मुफ्त चार्ट से चल जाता है? टेक्निकल एनालिसिस के कौन-से इंडीकेटर इस्तेमाल करने हैं? एंट्री, एक्जिट व स्टॉप लॉस का क्या सिस्टम अपनाना है? पक्का कर लें कि आपने सिस्टम में संस्थाओं की मांग व सप्लाई के संकेत ज़रूर शामिल किए गए हों। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

ट्रेडिंग के मकसद का मुख्य फ्रेम, उसके भीतर लक्ष्य, फिर सफलता का विज़न व बुद्धि के इस्तेमाल पर ज़ोर। आत्म अनुशासन के इन चार कदमों के बाद पांचवां कदम है अपने ट्रेडिंग सिस्टम के लिए सारा हार्डवेयर चौकस बनाने में जुट जाना। कहां बैठेंगे, सुबह या शाम कितना समय लगाना है, लैपटॉप कौन-सा होगा, नेट कनेक्शन किसका लेना है, किस ब्रोकर की सेवा लेनी है? इन सारे मसलों को कायदे से सुलझा लें। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

अपनी कमियों और बाज़ार के सच को समझने की दृष्टि हासिल करने के बाद परखें कि यहां कौन सफल होते हैं और कितने लाख कोशिशों के बावजूद पिटते रहते हैं। दोनों से सीखें। लेकिन किसी रोल मॉडल या अकाट्य मंत्र के चक्कर में न पड़ें। हां, बाज़ार के दिग्गजों को ज़रूर पढ़ना चाहिए। मोटे तौर पर समझ लें कि भावनाओं व आवेग को किनारे रख बुद्धि का जितना इस्तेमाल करेंगे, उतना सफल होंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

मकसद और लक्ष्य के बाद तीसरा कदम यह है कि आप सफलता का गहरा विज़न विकसित करें। बाज़ार में सफल होने के लिए कौन-कौन सी बातें ज़रूरी हैं। पूंजी के अलावा इसमें सबसे बड़े संसाधन खुद आप हैं। इसलिए बारीकी से समीक्षा करें कि आपकी कौन-सी कमज़ोरी सफलता हासिल करने में बाधा बन सकती है। उस पर ध्यान केंद्रित करें। अधिकतम कोशिश यह रहे कि हम बाजार के सच को साफ-साफ देख सकें। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग का मकसद स्पष्ट करने के बाद उसके मद्देनज़र तय करें कि आपका लक्ष्य क्या है। यह लक्ष्य हवा-हवाई नहीं,  बल्कि आपकी अपनी सामर्थ्य व संसाधनों के भीतर होना चाहिए। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का बिजनेस है और हर बिजनेस के लिए मेहनत के अलावा दूसरी सबसे ज्यादा ज़रूरी चीज़ होती है पूंजी। शेयरों की ट्रेडिंग में इस बाज़ार के लिए रखे कुल धन का 5% से ज्यादा नहीं लगाना चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी