हमारे यहां शेयर बाज़ार में कितने लोग सक्रिय ट्रेडिंग करते हैं? दोनों डिपॉजिटरी कंपनियों के सम्मिलित आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल डीमैट खातों की अद्यतन संख्या 3.04 करोड़ है। माना जा सकता है कि शेयर बाज़ार के निवेशकों की संख्या इसी के आसपास होगी। वैसे, बीएसई के मुताबिक निवेशकों की मौजूदा संख्या 3.72 करोड़ है। अंदाज़ लगाइए कि इनमें से कितने लोग महीने में कम से कम एक बार ट्रेडिंग करते होंगे? अब सोम का व्योम…औरऔर भी

अर्थशास्त्र के महाज्ञानी, नोबेल पुरस्कार विजेता तक कह चुके हैं कि छोटी अवधि में शेयरों के भावों की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। दूसरे शब्दों में शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग मूलतः अटकलबाज़ी या कयासबाज़ी पर ही आधारित है। हालांकि बाज़ार के मनोविज्ञान और भावों के पिछले पैटर्न से नई खरीद या बिक्री का अनुमान लगाया जाता है। लेकिन वह भी होता तो अनुमान ही है। इसलिए यहां स्टॉप लॉस न लगाना आत्मघाती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

एलआईसी जैसी संस्थाओं और प्रोफेशनल ट्रेडरों की राह ही सही है। वे किसी सामान्य व्यापार की तरह शेयर बाज़ार में थोक के भाव पर खरीदते और रिटेल के भाव पर बेचते हैं। लेकिन ज्यादातर रिटेल ट्रेडरों को लगता है कि शेयर बाज़ार अन्य बाज़ारों से बहुत भिन्न है और वे अपना कोई सिस्टम विकसित किए बिना टिप्स के चक्कर में मारे-मारे फिरते हैं। सौदा गलत पड़े तो उनका अहंकार और ज्यादा फुफकारता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

एलआईसी ने चालू वित्त वर्ष 2017-18 में अप्रैल से सितंबर तक के छह महीनों में शेयर बाज़ार से 12,374 करोड़ रुपए का मुनाफा कमा लिया जो साल भर पहले की समान अवधि के मुनाफे 10,643 करोड़ रुपए से 16.26% ज्यादा था। अमूमन औसत प्रोफेशनल ट्रेडर साल में बाज़ार से 10 लाख रुपए कमाते हैं। यानी, एलआईसी ने छह महीने में ही करीब सवा लाख प्रोफेशनल ट्रेडरों जितना कमा लिया। कौन किस पर भारी! अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

साल 2017 का आखिरी हफ्ता। यह शेयर बाज़ार के लिए शानदार साल रहा। 23 दिसंबर 2016 से 22 दिसंबर 2017 के बीच सेंसेक्स 30.34% और निफ्टी 31.40% बढ़ा है। हर ट्रेडर को समीक्षा करने की ज़रूरत है कि बाज़ार ने जब इतना दिया तो उसने कितना कमाया? अगर बाज़ार से ज्यादा नहीं कमाया तो कहां चूक रह गई? मनन करें कि आखिर अपनी ट्रेडिंग के तरीके में आगे क्या सुधार कर सकते हैं? अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

गुजरात चुनावों में भाजपा के कमज़ोर बहुमत का असर यह होगा कि मोदी सरकार बाकी बचे करीब सवा साल के कार्यकाल में कठोर आर्थिक फैसले लेने से बचेगी और लोगों को लुभानेवाले फैसलों को तवज्जो देगी। हो सकता है कि शेयर बाज़ार इन फैसलों को बहुत उत्साह से न ले। दूसरे, सितंबर 2013 से चल रही तेज़ी के बाद बाज़ार में अभी नहीं तो कुछ महीने बाद मुनाफावसूली का दौर चल सकता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार के कुछ लोग पुराने अनुभव से बताते हैं कि गुजरात चुनावों से पहले के पंद्रह दिनों में शेयर बाज़ार अक्सर चढ़ता है, जबकि चुनाव बीतने के बाद के तीस दिनों में अमूमन गिरता है। हालांकि ऐसी मान्यताओं का कोई तार्किक आधार नहीं होता। लेकिन इनका मनोवैज्ञानिक पहलू ज़रूर होता है। सोचने की बात है कि साल भर से बढ़ रहे बाज़ार में कहीं इस गिरावट का आगाज़ तो नहीं हो गया है? अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

इस समय बाज़ार को राजनीति का ज़ोर और एलआईसी जैसी घरेलू संस्थाओं की खरीद चढ़ाए जा रही है। म्यूचुअल फंड भी आम निवेशकों की लालच को आगे बढ़ाए जा रहे हैं। भाजपा की सामान्य जीत पर यह हाल है। 150 सीटें पाने पर तो बाज़ार में आग लग जाती। वास्तविकता यह है कि आगे 2019 में केंद्र में सरकार बनाने का भाजपा का रास्ता कठिन हो गया है। इसलिए देर-सबेर करेक्शन अवश्यंभावी है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार ने कल गुजरात में मतगणना के शुरुआती रुझानों के बाद सुबह-सुबह जैसा गोता लगाया और फिर उबरा, उसने एक बार फिर इस नियम की पुष्टि की है कि तगड़ी न्यूज़ के दिन आम ट्रेडरों को बाज़ार से दूर रहना चाहिए। अन्यथा, ऐसा झटका लगता है कि सारी पूंजी एक झटके में स्वाहा हो जाती है। बड़े खेलें, अच्छी बात है क्योंकि उनकी बड़ी औकात है। लेकिन छोटों को संभलकर चलना होगा। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार या कोई अन्य बाज़ार हो अथवा लोकतांत्रिक चुनाव, उसमें छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। लेकिन भारत जैसे देश में फिलहाल इस तरह की शुद्धता व्यवहार में नहीं मिलती। शेयर बाज़ार में इनसाइडर ट्रेडिंग चलती है। शेयरों के भावों से छेड़छाड़ की जाती है। हमें इस हकीकत को स्वीकार करके चलना पड़ेगा। साथ ही राजनीति में भी जोड़तोड़ ही नहीं, ईवीएम तक से छेड़छाड़ बढ़ती जा रही है। इसे रोकना होगा। अब परखते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी