कल क्या हुआ, यह हम सभी जानते हैं। लेकिन कल क्या होगा, यह कोई नहीं जानता। कल अच्छा भी हो सकता है, सामान्य भी और बुरा भी। एक अकेले व्यक्ति का इस पर कोई वश नहीं। हां, सामूहिक रूप से जरूर इसे कुछ हद तक बांधा जा सकता है।और भीऔर भी

आप बुद्धिमान हैं, अच्छी बात है। लेकिन क्या आप बुद्धिमानी से दुनिया को देख रहे हैं? शायद नहीं, क्योंकि इसके लिए काफी अध्ययन, मनन और ज्ञान की जरूरत है। इसलिए बुद्धिमान होने से ज्यादा महत्वपूर्ण है जीवन को बुद्धिमानी से देखना व जीना।और भीऔर भी

भावुक किस्म के जीव हैं हम। सजीव क्या, निर्जीव चीजों तक से मोह पाल लेते हैं। साल-छह महीने भी साथ रह लिए तो छोड़ते वक्त गला भर आता है। पर दुनियादारी के लिए यह भावुकता भली नहीं।और भीऔर भी

आदतों के बिना ज़िंदगी नहीं चलती। एकदम रसहीन बन जाती है। इसलिए आदतें तो डालनी ही पड़ती हैं। अब यह आप पर है कि आप खुद को अच्छी आदतों का गुलाम बनाते हैं या बुरी आदतों का।और भीऔर भी

हर तरफ बुरा ही बुरा है। सब कुछ टेढा-मेढा है। यह सोच-सोच कर रोने का कोई अंत नहीं है। देखना और सोचना यह चाहिए कि जो बुरा है, वो वैसा क्यों है। यह सिरा पकड़ कर ही हम उसे अच्छा कर सकते हैं।और भीऔर भी

हमारे लिए क्या अच्छा है क्या बुरा, इस पर हम अक्सर दूसरों की राय पर चलते हैं जिससे भ्रांति ही उत्पन्न होती है। हमें अपना फैसला खुद करना होगा। तभी हम सही काम को सही ढंग से कर पाएंगे।और भीऔर भी

चीजें पहले अच्छी लगती हैं। फिर अपनी लगती हैं। फिर, अपनी बनती हैं। पर, अच्छा लगने और अपना बनने तक का सफर सीधा-सरल नहीं होता। यह बात विचारों से लेकर लोगों तक पर लागू होती है।और भीऔर भी

जीवन की कमियां, कमजोरियां, अधूरापन जब भावनाओं का आधार होता है तो वे अच्छी होती हैं, सच्ची होती हैं। लेकिन अच्छी-सच्ची भावनाएं अक्सर विचारधाराओं की सूली चढ़ जाती हैं। ये कतई अच्छी बात नहीं है।और भीऔर भी