कालिदास के झापड़ मारने के लिए उठे पंजे को पंच महाभूत और घूसे को एकल ब्रह्म बताने जैसी विद्वानों की व्याख्याओं को छोड़ दिया जाए तो मोदी सरकार के पहले बजट में ऐसा कुछ नहीं जिसकी उम्मीद बाज़ार महीनों से संजोए हुए था। उम्मीद से नाउम्मीदी के बीच निफ्टी 3.32% या 252 अंक ऊपर-नीचे हुआ। कुछ तो होगा, की उम्मीद में दो बजे के आसपास उठने की कोशिश की। पर अंततः लुढ़क गया। शुक्र को क्या होगा…औरऔर भी

बजट का दिन। आसमान चढ़ी उम्मीदों की परीक्षा का दिन। हो सकता है कि आज बाज़ार 4-5% ऊपर-नीचे हो जाए। अगले दो दिन भी ज्वार-भांटा चल सकता है। लालच खींचता है कि इस उतार-चढ़ाव पर दांव लगाकर डेरिवेटिव्स से एक दिन में 100% तक बनाए जा सकते हैं। लेकिन संभल नहीं पाए तो पूरी पूंजी स्वाहा! ट्रेडिंग का पहला नियम है कि रिस्क को न्यूनतम करो और पूंजी को संभालो। अब करें, अभ्यास बजट के दिन का…औरऔर भी

शेयर बाज़ार भले ही लंबे समय में कंपनियों के फंडामेंटल और निवेशकों के रवैये से चलता हो। लेकिन छोटे समय में वो ट्रेडरों के रुख और मानसिकता से चलता है। जिन लोगों ने पिछले तीन महीनों में बाज़ार को करीब 16.5% चढ़ाया था, उनके सब्र का बांध अब टूटने लगा है और वे मुनाफावसूली करने लगे हैं। इनमें से बहुतेरे ट्रेडर तो प्रति माह 1.5-2% ब्याज पर धन उठाकर लगाते हैं। मुनाफावसूली के माहौल में अगली रणनीति…औरऔर भी

बजट के आसपास भांति-भांति की चर्चाएं चल निकलती हैं। ऐसी ही एक चर्चा है कि मोदी सरकार मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज़ पर खास मेहरबान हो सकती है। पीटीए पर एंटी डपिंग ड्यूटी लग सकती है। पॉलिमर पर एक्साइज ड्यूटी घट सकती है और कच्चे तेल के आयात पर सेस लगाया जा सकता है। प्राकृतिक गैस उत्पादन व रिफाइनरी पर टैक्स छूट की मीयाद बढ़ाई जा सकती है। इनको कतई न दें तवज्जो। अब नज़र बाज़ार पर…औरऔर भी

हम राकेश झुनझुनवाला या एफआईआई नहीं जो अपनी खरीद से किसी शेयर को चढ़ा दें। न ही हम बैंकर, ब्रोकर या कंपनी प्रवर्तक हैं कि अंदर की खबरें घोषित होने से पहले हमारे पास पहुंच जाएं। हमारी सीमा है कि भावों की भाषा ही ट्रेडिंग का हमारा एकमात्र औजार है। इसे पढ़ने में माहिर हो जाएं और प्रायिकता के मद्देनज़र रिस्क-रिटर्न का सामंजस्य बैठा लें तो जीत हमारी। अन्यथा हारना हमारी नियति है। अब हफ्ता बजट का…औरऔर भी

हम हिंदुस्तानियों जैसा उद्यमी सारी दुनिया में शायद ही कहीं मिले। हम हर चीज़ में असली काम का जुगाड़ निकाल लेते हैं। शायद आप जानते ही होंगे कि पंजाब के ढाबों और बड़े घरों में वॉशिंग मशीन से लस्सी बनाई जाती है। कुछ यही हाल शेयर बाज़ार में ऑप्शंस/फ्यूचर्स ट्रेडिंग का है। महज 12वीं पास, गणित में कमज़ोर, अंग्रेज़ी में तंग। फिर भी ज़नाब कॉल और पुट में सिद्धहस्त हैं। करते नमन इसका, बढ़ें शुक्रवार की ओर…औरऔर भी

ट्रेडिंग में कोई एक रणनीति हर वक्त काम नहीं करती। जनवरी में स्ट़ॉक चुनने से लेकर ट्रेडिंग का जो तरीका था, वह चार महीने बाद मई तक आते-आते बदल गया। अब मोदी सरकार का पहला आम बजट आने में महज एक हफ्ता बचा है तो इन दिनों की ट्रेडिंग रणनीति अलग होगी। बदलते हालात में जो स्थाई चीज़ है, वो है लचीलापन। हमारी ट्रेडिंग मानसिकता का जरूरी तत्व होना चाहिए लचीलापन। अब करें शुरू गुरु का अभ्यास…औरऔर भी

हम सभी व्यक्तिगत ट्रेडर हैं। शेयर बाज़ार के घराती नहीं, बराती हैं। हम खुद कुछ नहीं बनाते। दूसरों के बनाए पर खेलते हैं। इन दूसरों में 9275 ब्रोकर, 51707 सब ब्रोकर, 1709 विदेशी संस्थागत निवेशक व उनके 6391 सब एकाउंट, 50 म्यूचुअल फंड, 207 वेंचर कैपिटल फंड और बीसियों बैंकों के साथ हज़ारों प्रोफेशनल ट्रेडर व एचएनआई शामिल हैं। इन सभी की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए ही हमें ट्रेडिंग करनी चाहिए। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

बाजार में एक उन्माद-सा छाया हुआ है। लोग खरीदने का फैसला कर चुके हैं। बस, वजह की तलाश है। सेंसेक्स साल के पहले छह महीने में 20.21% बढ़ गया, जबकि इस दौरान अमेरिका का बाज़ार 6.1% और जर्मनी का बाज़ार 2.8% ही बढ़ा है। विदेशी निवेशक भारत में 1000 करोड़ डॉलर से ज्यादा झोंक चुके हैं। बीएसई-500 के करीब 100 मिड व स्मॉलकैप स्टॉक्स पिछले छह महीने में दोगुने हो चुके हैं। ऐसे में बढ़ें ज़रा संभलकर…औरऔर भी

ट्रेडिंग एक हुनर है, जो जन्मजात नहीं, बल्कि सीखा जाता है। हरेक कामयाब ट्रेडर को निरपवाद रूप से सीखने के दौर से गुजरना पड़ता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इस धंधे में कोई एंट्री-बैरियर नहीं। आपकी पृष्ठभूमि क्या है, उम्र क्या है, अनुभव है कि नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ता। कोई भी शख्स अध्ययन, मनन व अभ्यास से कामयाब ट्रेडर बन सकता है, बशर्ते सही सोच और पूरा समर्पण हो। चलिए, बढ़ें सोमवार की ओर…औरऔर भी