कमजोर होती यूरोप मुद्रा यूरो और देश के भीतर कॉरपोरेट क्षेत्र व तेल कंपनियों की तरफ से डॉलर की मांग बढ़ती जा रही है तो रुपया गिरता चला जा रहा है। मंगलवार को एक डॉलर 50.76 रुपए का हो गया है जो 31 मार्च 2009 के बाद के 32 महीनों में रुपए का सबसे कमजोर स्तर है। सोमवार को यह डॉलर के सापेक्ष 50.285/295 रुपए पर बंद हुआ था। मंगलवार को रिजर्व बैंक की संदर्भ दर 50.5645औरऔर भी

भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के सापेक्ष कमजोर होकर 49.825 रुपए तक चला गया। लेकिन बाद में 49.50 रुपए पर आकर थम गया। रिजर्व बैंक की संदर्भ दर आज डॉलर के सापेक्ष 49.663 रुपए रही। जानकारों का कहना है कि रिजर्व बैंक अगर बाजार में डॉलर नहीं बेचता तो रुपए की विनिमय दर कभी भी 50 रुपए के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर सकती है। लेकिन रिजर्व बैंक फिलहाल ऐसे किसी भी हस्तक्षेप के लिए तैयार नहींऔरऔर भी

चालू खाते के बढ़ते घाटे से परेशान सरकार देश में विदेशी पूंजी को खींचने की हरचंद कोशिश कर रही है। इसी के तहत 2011-12 के बजट में जहां कॉरपोरेट बांडों को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निवेश सीमा बढ़ाकर 40 अरब डॉलर कर दी गई है, वहीं म्यूचुअल फंडों को अपनी इक्विटी स्कीमों में सीधे विदेशी निवेशकों से अभिदान या सब्सक्रिप्शन लेने की इजाजत दे दी गई है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यह घोषणा करते हुएऔरऔर भी

यूरो जोन में चल रहे संकट के चलते भारतीय रुपया डॉलर के सापेक्ष मंगलवार को करीब आठ महीनों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। यह बंद तो हुआ 47.71/72 रुपए प्रति डॉलर की विनिमय दर पर, लेकिन दिन में एक समय 47.75 तक चला गया था जो 1 नवंबर 2009 का स्तर है। सोमवार को रुपए की विनिमय दर 46.98/99 प्रति डॉलर थी। असल में व्यापारियों के मुताबिक इसकी प्रमुख वजह यह है कि यूरो डॉलर केऔरऔर भी