छुटपन में मां, फिर बाप और फिर शरीर ही हमारा खेवैया होता है। इसे शराब के क्षार, धूम्रपान व तंबाकू की घुटन और भोजन की अशुद्धता से अस्थिर रखेंगे तो वह सहजता से कैसे हमारा ख्याल रख पाएगा!और भीऔर भी

डायबिटीज के मरीजों की संख्या में तीव्र वृद्धि के बीच दुनिया भर की कंपनियां इसके इलाज और इसकी रोकथाम के लिए नई दवाओं के विकास पर जोर दे रही हैं। दो साल के भीतर नई विकसित की जा रही दवाओं की संख्या करीब ढाई गुना हो गई है। अमेरिका की अग्रणी दवा अनुसंधान और जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों के संघ, फार्मास्यूटिकल रिसर्च एंड मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन (पीएचआरएमए) के मुताबिक 2010 में उसकी सदस्य कंपनियों द्वारा डायबिटीज या मधुमेह कीऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने दो दवाओं के इस्‍तेमाल पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। ये दवाएं हैं – गैटीफ्लॉक्‍सासिन और टेगासेरॉड। सरकार ने यह फैसला इन दवाओं से स्‍वास्‍थ्य को हो रहे खतरे को देखते हुए लिया है। सरकार का कहना है कि इन दवाओं सुरक्षित विकल्‍प मौजूद हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इन दवाओं के उत्‍पादन, बिक्री व वितरण पर जनहित में रोक लगाना आवश्‍यक है। यह रोक ड्रग्‍स एंड कॉस्मेटिक्‍स एक्ट, 1947 की धाराऔरऔर भी

अमेरिकी खाद्य व औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) के अनुमोदित दवा संयंत्रों की संख्या भारत में 175 है। यह अमेरिका के बाहर यूएसएफडीए की जांच के दायरे में आनेवाले दवा संयंत्रों की सबसे बड़ी संख्या है। भारत में ऐसे दवा संयंत्रों की संख्या साल 2007 में 100 के आसपास थी। असल में रैनबैक्सी, ल्यूपिन, सनफार्मा, अरबिंदो फार्मा व ऑर्किड केमिकल्स जैसी तमाम भारतीय कंपनियां अपनी जेनेरिक  दवाएं अमेरिकी बाजार में बेचती हैं। इसलिए यूएसएफडीए भारत तक में आकर इनकेऔरऔर भी