परेशां खामखां
ज़िंदगी में पुराने का जाना और नए का आना रिले रेस की तरह नहीं, समुद्र की लहरों की तरह चलता है। लेकिन हम पुरानी लहर के भीतर बन रही नई लहर को नहीं देख पाते और खामखां परेशान हो जाते हैं।और भीऔर भी
ज़िंदगी में पुराने का जाना और नए का आना रिले रेस की तरह नहीं, समुद्र की लहरों की तरह चलता है। लेकिन हम पुरानी लहर के भीतर बन रही नई लहर को नहीं देख पाते और खामखां परेशान हो जाते हैं।और भीऔर भी
कोई भी काम इतना नया नहीं होता कि थोड़ा-बहुत सीखने के लिए पुराने अनुभव न हों और कोई भी काम इतना पुराना नहीं होता कि कोई खब्ती दावा कर सके कि यह काम तो हम बहुत पहले आजमा कर फेंक चुके हैं।और भीऔर भी
यूं तो नया आने के साथ ही पुराना मिटना शुरू हो जाता है। लेकिन पुराने कंकास को हटाने का काम सायास करना पड़ता है। दीपावली से ठीक पहले की रात मन व जीवन के कंकास या दलिद्दर को हटाने का मौका होती है।और भीऔर भी
पुराने के भीतर नया पनपता रहता है। प्रकृति में पुराना हमेशा नए को जगह दे देता है। लेकिन समाज में पुराना अपनी जगह सहजता से छोड़ने को तैयार नहीं होता। इसलिए संघर्ष होता है, खून-खच्चर होता है।और भीऔर भी
जब भी हम नया कुछ रचते हैं, रुके हुए सोते बहने लगते हैं, अंदर से ऐसी शक्तियां निकल आती हैं जिनका हमें आभास तक नहीं होता। इसलिए काम शुरू कर देना चाहिए, काबिलियत अपने-आप आ जाएगी।और भीऔर भी
पुराने के बीच हमेशा नया बनता रहता है। पुराना हमें बांधे रखता है तो नया हमें खींचता है। इनके बीच हम तलवार की धार पर चलते हैं। लेकिन नया-नया रटने के बावजूद ज़रा-सा चूके तो पुराने के खेमे में जा गिरते हैं।और भीऔर भी
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