बीईएमएल सरकार की मिनी-रत्न कंपनी है। रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है। पहले इसका नाम भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड हुआ करता था। ए ग्रुप की कंपनी है। इधर चर्चा है कि उसे बड़े ऑर्डर मिलनेवाले हैं और सरकार अपनी थोड़ी इक्विटी हिस्सेदारी बेच भी सकती है। हालांकि कंपनी में सरकार की वर्तमान हिस्सेदारी 54.03 फीसदी है। इसलिए वह बहुत बेचेगी तो 3 फीसदी इक्विटी ही बेच सकती है क्योंकि इसमें 51 फीसदी से कम सरकारी हिस्सेदारीऔरऔर भी

नैवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (एनएलसी) बढ़ रही है, लेकिन उसका शेयर ठहरा हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी ने इस साल जून की पहली तिमाही में 342.10 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हासिल किया है जो साल भर पहले की इसी अवधि के शुद्ध लाभ 287.64 करोड़ रुपए से 18.93 फीसदी ज्यादा है। इससे पहले पूरे वित्त वर्ष 2009-10 में उसका शुद्ध लाभ 52 फीसदी बढ़ा था। उसका परिचालन लाभ मार्जिन (ओपीएम) अब 51.49 फीसदी हो गयाऔरऔर भी

हरियाणा के उपभोक्ता, सरकार और उद्योग महंगी बिजली के जबरदस्त कुचक्र में फंस गये हैं। बिजली कंपनियों का घाटा पिछले चार गुना बढ़ाकर पिछले 1400 करोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार अपना खजाना फूंक कर बाजार से दोगुनी अधिक कीमत में बिजली खरीद रही है। इसी को कहते हैं घर फूंक कर रोशन करना। कर्ज लेकर घी पीना। राज्य की बिजली कंपनियां बिजली की जगह घाटा बना रही हैं। बिजली क्षेत्र की यह बदहाली आने वालेऔरऔर भी