1857 के पहले स्वाधीनता संग्राम के दमन के बाद ब्रिटिश राज को महफूज़ रखने के लिए सीआरपीसी की धारा-144 बनाई गई थी। अंग्रेज सरकार का मानना था कि जब पांच से ज्यादा लोग इकठ्ठा ही नहीं हो सकेंगे तो सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन क्या खाक करेंगे। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन आंदोलन के खिलाफ इसका जमकर इस्तेमाल हुआ। लेकिन गुलाम भारत का यह निषेधाज्ञा कानून आज़ाद भारत की लोकतांत्रिक सरकार ने भी बनाए रखा है। दारूऔरऔर भी

सात द्वीपों के शहर मुंबई ने 300 ईसा-पूर्व में ही रोम के साथ व्यापारिक संबंध बना रखे थे। विदेशी घुसपैठियों के रूप में यहां पुतर्गाली सबसे पहले 1498 में आए। उन्होंने अपनी भाषा में इसका नाम रखा बोम बहिया जिसका अर्थ होता है अच्छी छोटी खाड़ी। कालान्तर में यह पहले बॉम्बे, फिर बंबई और अब मुंबई हो गया। ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1668 में इसे पुर्तगालियों से मात्र दस पौंड में खरीदा। 1857 में आज़ादी के पहलेऔरऔर भी

1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी से भारत में सत्ता की बागडोर अपने हाथों में लेते ही ब्रिटिश सरकार ने सार्वजनिक खातों के लेखा-परीक्षण की अहमियत समझ ली थी। उसने 16 नवंबर 1860 को भारत का पहला महा लेखा-परीक्षक एडमंड ड्रुमंड को बनाया था। ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद भारत 1950 में गणराज्‍य बन गया और महा लेखा-परीक्षक का पद जारी रहा हालांकि इसका नाम बदलकर भारत का नियंत्रक एवं महा लेखा-परीक्षक (सीएजी या कैग) कर दियाऔरऔर भी