हम भगवान को मानना बंद कर दें तो बाबाओं की ही नहीं, नेताओ व अभिनेताओं तक की दुकान बंद हो जाए। भगवान तो शक्तिहीन मूरत है, जबकि उसके नाम पर असली शक्ति इन कलाबाजों को मिलती है।  और भीऔर भी

हम व्यक्ति या वस्तु को जानकर नहीं, मानकर चलते हैं। परखने से पहले ही उन्हें किसी खांचे में कस लेते हैं और उसके हिसाब से अपेक्षाएं पाल लेते हैं। ऐसे में धोखा खाते हैं तो इसमें दोष हमारा भी है।और भीऔर भी

24 घंटे में 8 घंटे सोना और बाकी 16 घंटा जगना। दिनचर्या का यही चक्र है। लेकिन सवाल यह है कि जगने के दौरान हम चैतन्य कितने घंटे रहते हैं? इसी से हमारी मानव चेतना का स्तर तय होता है।और भीऔर भी

लोगों को जो जरूरत है और लोग जो चाहते हैं, हम उन्हें वही सिखा सकते हैं। साथ ही किसी को कुछ भी सिखाने से पहले जरूरी है यह जानना कि हम खुद दूसरों से कितनी सारी बातें सीख सकते हैं।और भीऔर भी

वे रेखाएं या आहट देखकर भविष्य बांचने का काम औरों का नहीं, अपना भविष्य संवारने के लिए करते हैं। भविष्यवाणी करना उनके पापी पेट का सवाल है। इससे हमें ढाढस के सिवा कुछ नहीं मिलता।और भीऔर भी

विचार किसी लता की तरह हैं जिन्हें अगर बाहर का कोई सहारा न मिले तो उनका बढ़ना रुक जाता है। इसलिए विचारों को बराबर व्यवहार के धरातल पर कसते रहना चाहिए। नहीं तो बे-काम हो जाते हैं।और भीऔर भी

हम सभी में उससे कहीं ज्यादा सामर्थ्य और संभावना होती है, जितना हम सोचते हैं। बस जरूरत है इसे निखारने की। इसके लिए चाहिए अटूट आत्मविश्वास और लड़कर हासिल करने का जुनून।और भीऔर भी

समय हथेलियों से फिसलती रेत की तरह निकलता जाता है। हाथ मलते रह जाते हैं हम कि इस साल भी खास कुछ नहीं कर पाए। तय करें कि नए साल के हर पल का तेल निकाल लेंगे, निरर्थक नहीं जाने देंगे।और भीऔर भी

इन दुनिया की खूबसूरती यह है कि यहां किसी की भी तानाशाही शाश्वत नहीं होती। यहां अंततः सामंजस्य और संतुलन ही चलता है। हर अति के अंदर से ही वे तत्व पनपते हैं जो उसका अंत कर देते हैं।और भीऔर भी

इंसान को अपने ही अंदाज में निखरने की ख्वाहिश रखनी चाहिए। दूसरा तो दूसरा ही है। हो सकता है ऊपर से कामयाब दिखता हो और अंदर से खोखला हो। उससे सबक सीखें, लेकिन कभी नकल न करें।और भीऔर भी