जो लोग थोड़े समय में अपना निवेश वापस पा लेना चाहते हैं, वे अदूरदर्शिता के शिकार हैं। थोड़े समय में कोई भी विचार पूरा खिल नहीं पाता। हो सकता है कि कई साल तक उससे कुछ न निकले। लेकिन जब वह फलीभूत होगा तो अरबों की बारिश कर सकता है।और भीऔर भी

सही व काम की शिक्षा पर किया गया खर्च कभी बेकार नहीं जाता। वो तो निवेश की तरह है जिसमें अभी उठाई गई थोड़ी-सी तकलीफ बाद में बड़े आराम का आधार बन जाती है। इसलिए शिक्षा को कभी उपभोग नहीं, हमेशा निवेश मानना चाहिए।और भीऔर भी

मन व्यग्र व परेशान हो तो हमें उसे शांत, स्वस्थ, संतुलित व संतुष्ट रखने के लिए, यकीन मानिए, निजी तौर पर किसी मनोरंजन की जरूरत नही होती क्योंकि हमारे सपने न जाने कहां-कहां से नायाब छवियां निकालकर यह काम बखूबी कर डालते हैं।और भीऔर भी

असहाय आदमी का मन और आसरा न टूटे, इसलिए चलेगा भगवान। इस बेरहम व पत्थर दिल दुनिया में एक भगवान ही तो है जो सोते-जागते हर पल कमजोर का साथ देता है। इसलिए भगवान को केवल पत्थर की मूर्ति या अमूर्त सत्ता मानकर नहीं चला सकता।और भीऔर भी

देश के लिए सोचना आसान है, करना कठिन। सोचने के लिए बस भावना चाहिए, जबकि करने के लिए सही हालात का सच्चा ज्ञान जरूरी है। भावना में सच्चे, ज्ञान में कच्चे रहे तो सत्ता के लिए लार टपकाता कोई समूह हमारा इस्तेमाल कर लेता है।और भीऔर भी

उन विचारों का क्या काम, जो हमारी अपनी गुत्थियों को न सुलझा सकें। फालतू हैं वे विचार हैं जो हमें पस्त हालत से निकाल न सकें। वो ज्ञान किस काम का जो महज दूसरों को प्रवचन देने के लिए है, लेकिन खुद हमें नया धरातल, संबल न दे सके।और भीऔर भी

अपना हाल हम ही जानते हैं या मानते हैं कि भगवान जानता है। दूसरों का हाल हम पूछते नहीं, न ही उसकी परवाह करते हैं। लेकिन चाहते हैं कि दूसरा हमारी परवाह करे। नहीं करता तो उसे निपट स्वार्थी बताते हैं। पर, अपनी तरफ देखने की जहमत नहीं उठाते।और भीऔर भी

भगवान या तो अदृश्य बैक्टीरिया है या वायरस या किसी किस्म की चुम्बकीय शक्ति। तीनों ही स्थितियों में उससे डरने की नहीं, निपटने की जरूरत है। लेकिन अंध आस्था में हम देख नहीं पाते कि भगवान से डराकर दूसरा अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहा है।और भीऔर भी

भगवान और धर्म के नाम पर खुल्लमखुल्ला लूट सदियों से जारी है। कभी राजा-महाराजा से लेकर पंडित, पादरी और मुल्ला यह काम करते थे। इतने अनुष्ठान कि लोगों का तर्क तेल लेने चला जाए। अब बाजार के जमाने में वही काम विज्ञापन करने लगे हैं।और भीऔर भी

भगवान पर ध्यान लगा हम अपने अंदर की शक्तियों और बाहर की ताकतों को साधते हैं। भगवान यहीं तक सीमित रहे तो बड़ा कल्याणकारी है। लेकिन, कोई जब दूसरों को खींचने के लिए भगवान का इस्तेमाल करने लगता है तो वह बड़ा विनाशकारी हो जाता है।और भीऔर भी