शुभ हो नई यात्रा!
2010-11-05
न आदि है, न अंत है। वह अनंत है। इस अनंत समय को कैसे नाथा जाए? लेकिन हमने इसे नाथ लिया। समय भले ही अनवरत बहता रहे, लेकिन दिन, महीने, साल में हम उसका हिसाब रखते हैं। नई यात्रा शुरू करते हैं।और भीऔर भी
न आदि है, न अंत है। वह अनंत है। इस अनंत समय को कैसे नाथा जाए? लेकिन हमने इसे नाथ लिया। समय भले ही अनवरत बहता रहे, लेकिन दिन, महीने, साल में हम उसका हिसाब रखते हैं। नई यात्रा शुरू करते हैं।और भीऔर भी
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