गंभीर बात को मजाक में उड़ा गए सुब्बाराव

इस समय बैंकों के करीब 2.98 लाख करोड़ रुपए रिजर्व बैंक के पास सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात) के रूप में पड़े हैं, जिस पर उन्हें कोई ब्याज नहीं मिलता। ताजा आंकड़ों के मुताबिक बैंकों की कुल जमा इस समय 62,82,350 करोड़ रुपए है। इसका 4.75 फीसदी उन्हें हर समय बतौर सीआरआर रिजर्व बैंक के पास रखना पड़ता है। इसलिए अगर देश के सबसे बैंक एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक) के चेयरमैन प्रतीप चौधरी ने सीआरआर को खत्म करने की बात कही थी, तो इसमें कुछ भी नाजायज नहीं था। लेकिन पहले रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर डॉ. केशब चंद्र चक्रबर्ती ने तैश में आकर कहा कि अगर प्रतीप चौधरी को सीआरआर का कोई तुक नहीं दिखता तो उन्हें कोई दूसरा काम ढूंढ लेना चाहिए। अब खुद रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने चौधरी और चक्रबर्ती में छिड़े वाकयुद्ध का मजाक उड़ा डाला।

उन्होंने मंगलवार को मुंबई में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और उद्योग संगठन फिक्की की तरफ से आयोजित सालाना बैंकिंग सम्मेलन में अपना औपचारिक उद्घाटन भाषण पेश करने से पहले सबको चौंकाते हुए कहा, “मुझे एक अहम घोषणा करनी है। मैंने सीआरआर को हटाने या न हटाने के बारे में एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी के सदस्य हैं – डॉ. चक्रबर्ती और प्रतीप चौधरी।”

सुब्बाराव के मुंह से यह बात सुनते ही मीडिया के कान खड़े हो गए। कुछ उत्साही पत्रकारों ने तो अपने-अपने संस्थानों में फ्लैश तक भेज दिया। रिजर्व बैंक गवर्नर ने अगले ही वाक्य में कहा, “इन दोनों लोगों को एक कमरे में बंद कर दिया जाएगा और तब तक वहां से बाहर नहीं निकाला जाएगा जब तक वे किसी नतीजे पर नहीं पहुंच जाते।। रिपोर्ट की समयसीमा यह है कि गवर्नर के रूप में मेरे कार्यकाल के खत्म होने से पहले वे अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपेगे।”

यह सुनते ही पूरे सभागार में हंसी के फव्वारे फूट पड़े। मगर मजे की बात है कि इसके बावजूद कुछ पत्रकारों को समझ में नहीं आया कि सुब्बाराव गंभीर हैं या मजाक कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र खत्म होने के बाद सुब्बाराव बाहर निकले तो पत्रकारों ने उन्हें घेरकर पूछ ही डाला कि उन्होंने जो बात कही, वह वाकई मजाक थी या कुछ और। सुब्बाराव ने पलटकर पूछा, “आपको क्या लगता है।”

रिजर्व बैंक गवर्नर ने अपने मूल भाषण में बताया कि बैंकिंग नियमन के नए मानक बासेल-3 को लागू करने के लिए भारतीय बैंकों को अगले कुछ सालों में 5 लाख करोड़ रुपयों की पूंजी जरूरत होगी। यूं तो दुनिया भर में बासेल-3 को दिसंबर 2018 तक अपना लेना है। लेकिन भारत में इसकी समयसीमा नौ माह पहले मार्च 2018 रखी गई है। इसे अपनाने की प्रक्रिया जनवरी 2013, यानी अगले साल से शुरू हो जाएगी।

2 Comments

  1. बासेल-3 ??????

  2. send new feature by email

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