जीवन ही नहीं, निवेश में भी हर साल कोई न कोई सबक देकर जाता है, बशर्ते हम सीखने को तैयार हों। साल 2025 का खास सबक यह है कि माहौल में जब हर तरफ उहापोह व दुविधा छाई हो, तब तिनके बचाते नहीं, सबसे पहले डूब जाते हैं। माना जाता है कि स्मॉल-कैप कंपनियों सबसे ज्यादा रिटर्न देती हैं। लेकिन बीते साल ने यह मिथक धराशाई कर दिया। 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2025 के बीच निफ्टी-50 सूचकांक 23,742.90 से 10.05% बढ़कर 26,129.60 पर पहुंच गया। मिडकैप-150 सूचकांक 4.85% रिटर्न के साथ 21,246.50 से बढ़कर 22,276.90 पर पहुंच गया। लेकिन इसी दौरान स्मॉलकैप-250 सूचकांक 6.83% गिरकर 17,908.80 से 16,684.75 पर आ गया। बीच में निफ्टी-500, निफ्टी-200 और निफ्टी-100 सूचकांक के रिटर्न भी 6.1% से 8.3% तक धनात्मक रहे हैं। इसलिए छोटी कंपनियों की तरफ ज्यादा रिटर्न की ख्वाहिश में आंख मूंदकर दौड़ना सही नहीं। हर धारणा को समय, माहौल और परिस्थिति के सापेक्ष ही देखना चाहिए। जीवन में निरंतर बदलाव ही शाश्वत सच है। बाकी निरपेक्ष सच जैसी कोई चीज नहीं होती। लॉर्जकैप कंपनियों के शेयर अब भी महंगे जरूर हैं, मगर हल्के नहीं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…
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