आर्थिक गतिविधियां कोरोना संकट से पहलेवाली स्थिति में कब लौटेंगी, नहीं पाता। हालांकि शेयर बाज़ार अब भी मानकर बैठा है कि सब ठीक होने जा रहा है। सवाल उठता है कि बाज़ार की तेज़ी सस्ते धन के प्रवाह और सटोरिया पूंजी की चहक के दम पर आई है या किसी ठोस आशावाद की बदौलत? ऊपर-ऊपर सब सुनहरा है। कोरोना से निपटने के वैश्विक वित्तीय पैकेज का धन भी भारत, चीन व इंडोनिशिया के बाज़ारों की तरफ बह रहा है। लेकिन ग्लोबल हो चुके वित्तीय जगत का कोई सामान्य डिफॉल्ट सारे बाज़ार का बंटाधार कर सकता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…
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