बेच सके तो बेच

संत हो या संसारी या हो कलाकार, हर कोई बेचने में जुटा है। इसके बिना किसी का गुजारा नहीं। सत्ता का प्रश्रय भी उसे ही मिलता है जिससे सत्ता को चलाने का तुक मिलता है। आज तो भिखारी भी वही सफल है जो अपनी दयनीयता को बेच लेता है।

1 Comment

  1. JIWAN YAPAN karne ke liye kise dhan nahi chahie ??? jineh nahi chahie kripya aapna haath uthai aur apne panw 180 degree mai felaa dijie .. bina kuch kie Moksch prapt ho jaiga . yeh to dhan se bhi bari prapti h .

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