किसी इंसान की बातों से तय नहीं होता कि वे दमदार हैं या कोरी बकवास। इसी तरह किसी राजनीतिक दल के घोषणापत्र या नारों से नहीं, बल्कि उसकी आंतरिक संरचना से तय होता है कि वह सचमुच अपने कहे पर अमल कर पाएगी या नहीं।
2012-07-06
किसी इंसान की बातों से तय नहीं होता कि वे दमदार हैं या कोरी बकवास। इसी तरह किसी राजनीतिक दल के घोषणापत्र या नारों से नहीं, बल्कि उसकी आंतरिक संरचना से तय होता है कि वह सचमुच अपने कहे पर अमल कर पाएगी या नहीं।
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