मुफ्त राशन देकर 81.35 करोड़ गरीबों को मुरीद बना लो। प्रोत्साहन स्कीम में सब्सिडी देकर मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ाने का दावा और अब प्रोत्साहन से ही प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना में 3.5 करोड़ से ज्यादा नई नौकरियों का सृजन। बाज़ार शक्तियों की परवाह नहीं। सरकार को लगता है कि वो ही सर्वशक्तिमान है। उसे दिखता नहीं कि उसकी इन नीतियों के चलते देश के जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग का हिस्सा 17.9% से घटते-घटते 2024-25 में 12.6% पर आ गया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 2025 तक 25% तक पहुंचाने का दम भरा था। अब प्रधानमंत्री मोदी ने इस बार फिर लालकिले की प्राचीर से ललकारा है कि वो एक लाख करोड़ रुपए की योजना लागू कर रहे हैं जिससे दो साल में निजी क्षेत्र में 3.5 करोड़ से ज्यादा रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। नौकरी पानेवाले को दो साल में ₹15000 और नौकरी देनेवाले को दो साल तक हर नए कर्मचारी पर प्रतिमाह ₹3000 का प्रोत्साहन। लेकिन निजी क्षेत्र में नौकरियां हैं कहां? नोटबंदी के बाद 6.25 लाख में से 3 लाख एमएसएमई इकाइयां बंद हो चुकी है। निजी क्षेत्र में क्षमता इस्तेमाल 75% पर अटका है और उसका पूंजी निवेश 11 साल का सबसे कम है। अब बुधवार की बुद्धि…
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