यूं तो अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भारत को कोई खास अहमियत नहीं है। उसके कुल व्यापार में भारत का हिस्सा 2% से भी कम है। लेकिन वो भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझीदार देश है। वित्त वर्ष 2024-25 में दिसंबर 2024 तक के नौ महीनों में भारत का कुल व्यापार 868.60 अरब डॉलर रहा है, जिसमें से अमेरिका का हिस्सा 95.02 अरब डॉलर या 10.94% था। यही नहीं, इस अवधि में अमेरिका के साथ भारत का सबसे ज्यादा 25.03 अरब डॉलर का व्यापार सरप्लस है। अमेरिका भारत के शीर्ष 25 व्यापार साझीदार देशों में से उन छह देशों (अमेरिका, नीदरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली व बांग्लादेश) में शामिल है जिनसे हम खरीदते कम और बेचते ज्यादा है। वैसे तो चीन हमारा दूसरा सबसे बड़ा व्यापार साझीदार देश है। लेकिन उसके साथ हमारा व्यापार घाटा सबसे ज्यादा 74.15 अरब डॉलर का है। इसलिए डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव पर मोदी सरकार का जवाब भारत के राष्ट्रीय आर्थिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दिक्कत यह है कि अभी तक वो ट्रम्प ही नहीं, उनके मित्र एलन मस्क के दबाव के आगे जिस तरह दंडवत व लंबलेट होती रही है, उससे कोई आश्वस्ति नहीं बनती कि हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा हो सकती है। मसला इस बार आम लोगों का नहीं, बल्कि कॉरपोरेट क्षेत्र का है जो अभी अंदर से एकदम हिला हुआ है। अब बुधवार की बुदधि…
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