नए साल के बजट पर विचार करने से पहले पता लगाना ज़रूरी है कि आखिर बजट में घोषणा के बाद चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान शिक्षा व शोध में अब तक हमारी क्या उपलब्धि रही है? बजट में दावा किया गया था कि शिक्षा पर ₹1,28,650 करोड़ आवंटित किए जा रहे है। हकीकत में यह 2024-25 के बजट आवंटन ₹1,25,638 करोड़ से मात्र 2.40% ज्यादा था और कुल ₹50,65,345 करोड़ के बजट का 2.54% ही था। कहा गया था कि शत-प्रतिशत अच्छी क्वालिटी की स्कूली शिक्षा दी जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश, हरियाणा व बिहार जैसे भाजपा शासित राज्यों में हज़ारों सरकारी स्कूल इस साल बंद कर दिए गए। कहा गया कि सरकार का लक्ष्य साक्षरता नहीं, बल्कि एम्प्लॉयबिलिटी को बढ़ाना है। पांच नए नेशनल सेंटर्स ऑफ एक्सेलेंस बनाकर उद्योग की जरूरतों के हिसाब से युवाओं को तैयार किया जाएगा, स्कूलों में 50,000 नई ‘अटल टिंकरिंग लैब’ बनाकर बच्चों में बचपन से ही कोडिंग और हार्डवेयर की समझ विकसित की जाएगी, प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप के तहत 10,000 नई फेलोशिप देकर मेधावी छात्रों को विदेश जाने से रोका जाएगा और भारत में ही शोध कराया जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि भारत अब भी रिसर्च पर जीडीपी का मात्र 0.6% खर्च करता है, जबकि अमेरिका 3.5% और चीन 2.4% खर्च करता है। अब मंगलवार की दृष्टि…
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