आज के दौर में 17 रेअर अर्थ खनिज मजबूत व समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला बन गए हैं। ये खनिज दरअसल धरती के भीतर पाए जानेवाले ऐसे तत्व हैं जो हरित ऊर्जा तक पहुंचने से लेकर देश के डिफेंस सिस्टम और इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर व सोलर पैनल जैसे उद्योगों के लिए बेहद ज़रूरी हैं। लेकिन खुद को राष्ट्रवादी बतानेवाली मोदी सरकार ने अपने 12 सालों के शासन में इन दुर्लभ तत्वों की प्राप्ति के लिए कुछ भी सार्थक नहीं किया। वो तो देश के जल, जंगल, ज़मीन, एयरपोर्ट व बंदरगाह जैसे उपलब्ध संसाधनों को येनकेन प्रकारेण अपने मित्रों के हवाले करने में लगी रही। मालूम हो कि भारत के पास दुनिया में रेअर अर्थ तत्वों का तीसरा सबसे बड़ा भंडार है। ओडिशा, तमिलनाडु, केरल व आंध्र प्रदेश के समुद्री तट की रेत में 1.30 करोड़ टन मोनाज़ाइट उपलब्ध है। केमिस्ट्री के छात्र जानते होंगे कि 17 रेअर अर्थ तत्वों में लैंथेनियम व ल्यूटेटियम जैसे 15 लैंथानाइड और स्कैंडियम व वाईट्रियम शामिल हैं। लैंथानाइड तत्व मुख्य पीरियोडिक टेबल के नीचे अलग कतार के रूप में दर्ज हैं, जबकि स्कैंडियम व वाईट्रियम मुख्य टेबल में ग्रुप-3 में ट्रांजिशन धातुओं के ऊपर रखे गए हैं। लेकिन जो सरकार डार्विन के सिद्धांत ही नहीं, पीरियोडिक टेबल तक को कोर्स से हटा देना चाहती है, उससे इन खनिज तत्वों को देशहित में निकालने की क्या उम्मीद की जाए! अब मंगलवार की दृष्टि…
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