तय मानकर चलें कि भारतीय शेयर बाज़ार का गुब्बारा किसी देशी घटनाक्रम से नहीं फूटेगा। ग्लोबल हो चुके बाज़ार में इसका स्रोत बाहरी होगा। अंदर तो हमारे समूचे तंत्र की इलास्टिक खींच-खींचकर इतनी ढीली कर दी गई है कि प्रधानमंत्री के खिलाफ घनघोर भ्रष्टाचार का महाभियोग भी खिसककर नीचे गिए जाएगा। बाहर से बाज़ार को जोर का झटका भयंकर उधारी का तंत्र टूटने पर लग सकता है। इस समय हालत यह है कि एक डॉलर लगाकर 500 डॉलर के सौदे किए जा रहे हैं। चंद संस्थाओं या व्यक्तिगत ट्रेडरों का डिफॉल्ट सब ध्वस्त कर सकता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…
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