ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिशराज में भारत से कच्चा माल लूटकर बाहर ले जाया गया और अंतिम उत्पाद बनाकर दुनिया भर के बाज़ारों में बेचा गया। इसमें सुगमता के लिए उन्होंने भारत में बंदरगाह व सड़कें बनाई और रेल नेटवर्क तैयार किया। उनकी इस अनीति से भारत के लाखों छोटे उद्योग-धंधे और कारीगर तबाह हो गए। मोदी सरकार भी कमोबेश यही कर रही है। अंतर बस इतना है कि वो विदेशी कंपनियों को भारत में कच्चा माल ही नहीं, सस्ता श्रम और उत्पादन का पूरा तंत्र भी उपलब्ध कराती है और कहती है कि विदेश में जाकर जमकर बेचो। पिछले साल 15 मार्च 2025 को एमएसएमई की राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने राज्यसभा में बताया था कि वित्त वर्ष 2024-25 में 28 फरवरी तक देश भर में 35,567 सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम बंद हो गए हैं। पहले 25 नवंबर 2024 को अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय मुख्य महासचिव बजरंग गर्ग ने बताया था कि पिछले सात सालों में देश के 48% एमएसएमई बंद हो चुके हैं। उन्होंने सरकारी डेटा के आधार पर बताया कि 2016 में देश में 6.25 करोड़ छोटी इकाइयां थीं, जो 2023 तक घटकर 3.25 करोड़ रह गईं। वैसे, सरकार कहती है कि अभी इनकी संख्या 7.73 करोड़ है। लेकिन इसमें से 3.12 करोड़ अनौपचारिक माइक्रो उद्यम (आईएमई) हैं तो असल में बाकी बचे 4.61 करोड़। अब गुरुवार की दशा-दिशा…
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