शेयर बाज़ार में उथल-पुथल। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) भागे जा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक कभी खरीद तो कभी बिक्री करते हुए शेयरों से कुल मिलाकर ₹26,317 करोड़ निकाल चुके हैं। इसमें भी अगस्त में उन्होंने ₹34,993 करोड़ की शुद्ध निकासी की है, जबकि सितंबर के पहले पांच दिन में ही ₹12,257 करोड़ निकाले हैं। बीते वित्त वर्ष 2024-25 में उन्होंने ₹1,27,041 करोड़ निकाले थे। इस बार उथल-पुथल के भरे दौर में क्या होगा, पता नहीं। हमारे शेयर बाज़ार का प्रमुख सूचकांक निफ्टी-50 इस समय 21.63 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा। इसमें खतरे का निशान 25 के ऊपर जाना माना जाता है। यह सितंबर 2024 में 24.38 तक जाने के बाद गिरना शुरू हो गया। लेकिन 11.28% गिरने के बावजूद एफपीआई को लगता है कि भारतीय शेयर बाज़ार अब भी महंगा है। यह सच भी है क्योंकि अमेरिका को छोड़ दें तो यूरोप, चीन, हांगकांग, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया व इंडोनेशिया जैसे तमाम बाज़ार भारत से काफी सस्ते हैं। इसलिए पूरी आशंका है कि जीएसटी की नई दरों के बूस्टर डोज़ के बावजूद अपना बाज़ार और गिर जाए। तब निवेश के अवसर और बढ़ जाएंगे। अब तथास्तु में आज की कंपनी…
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