डोनाल्ड ट्रम्प ललकार रहे हैं कि ईरान के खिलाफ युद्ध चार-पांच हफ्ते चलेगा। वहीं, ईराने अपने वजूद के लिए लड़ रहा है तो वह तब तक लड़ेगा, जब तक अमेरिका पीछे नहीं हट जाता। साथ ही इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू का सफाया उसका लक्ष्य है। ईरान बार-बार कह चुका है कि उसने तो डिप्लोमैसी का राह चुनी थी और युद्ध उस पर थोपा गया है। तथ्यों से भी यही सच निकलता है। जून 2025 में भी अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था। लेकिन 28 फरवरी 2026 का हमला इस मायने में अलग है कि यह युद्ध तब छेड़ा गया है, जब ओमान की मध्यस्थता में हुई बातचीत में ईरान ने अमेरिका की सारी शर्तें मान ली थीं। उसने मान लिया था कि परमाणु सामग्रियों का सारा भंडार खत्म कर देगा, अभी तक एनरिच किए गए 60% स्टॉक को ईंधन में बदल देगा और अमेरिका के निरीक्षकों को अपनी सारे परमाणु ठिकानों तक जाने की छूट देगा। यहां तक कि उसने कहा था कि वो अमेरिका के सुलाए अन्य उपाय भी तुरंत लागू करने को तैयार है। यह भी कि मौजूदा सहमति ओबामा के समय ईरान के साथ की गई परमाणु संधि से काफी बेहतर है। ओमान लगा रहा कि अमेरिका के हमले से किसी तरह रोक लिया जाए। लेकिन ट्रम्प ने हमले को ईरान में शासन परिवर्तन से जोड़ दिया। ऐसे में ईरान की स्थिति लड़ो या मरो की हो गई है। अब बुधवार की बुद्धि…
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