भारत यकीनन विकसित देश बन सकता है और बनेगा भी। लेकिन किसी व्यक्ति के चमत्कार या उसके हाथों में सारी सत्ता केंद्रित कर देने से नहीं, बल्कि संस्थाओं को मजबूत करने से। ईडी, सीबीआई, एनआईए, इनकम टैक्स विभाग तो कब के अपनी स्वायत्तता खोकर सरकारी गुलाम बन चुके हैं। नीति आयोग से लेकर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद तक जी-हुजूरियों के मंच हैं। चुनाव आयोग पूरी तरह सत्तारूढ़ दल की कठपुठली बन चुका है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक सत्ता की राजनीति से अछूते नहीं रहे। देश के विकास की बहुत बड़ी बाधा न्याय की कछुआ चाल है। इस साल के शुरू तक सुप्रीम कोर्ट में 82,000 सें ज्यादा मुकदमे लटके थे। हाईकोर्ट और जिला अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या लाखों में है। देश में हर दस लाख की आबादी पर महज 21 जज है, जबकि अपने ही विधि आयोग की सिफारिश कम से कम 50 जजों की है। 1992 के हर्षद मेहता घोटाले से जुड़े मामलों के लिए मुंबई में जो विशेष अदालत बनी थी, वो 33 साल बाद भी सुनवाई किए जा रही है। विश्व बैंक के मुताबिक कॉन्ट्रैक्ट लागू करने में भारत दुनिया के 190 देशों की रैंकिंग में 163वें स्थान पर है। 2016 में आया दिवालिया कानून व्यवहार में खुद दिवालिया साबित हुआ है। जीएसटी का तथाकथित सुधार अंततः सरकारी खर्च में कटौती का सबब बन जाएगा। अब शुक्रवार का अभ्यास…
यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं।
इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...
